“क्या सरकारी दावों और मंडी की हकीकत के बीच किसान हमेशा ऐसे ही पिसता रहेगा?” भोपाल: सरकार ने किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। लेकिन, मंडियों में जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मंडियों में किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है और उन्हें मजबूरी में अपना गेहूं 425 रुपये तक कम कीमत में बेचना पड़ रहा है। नियमों की हो रही है अनदेखी नियमों के अनुसार, मंडी में गेहूं की नीलामी MSP यानी 2625 रुपये से शुरू होनी चाहिए। अगर फसल की क्वालिटी खराब है, तभी मंडी के अधिकारी दखल देकर दाम कम कर सकते हैं। लेकिन, आरोप है कि व्यापारी और मंडी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से अच्छी फसल को भी खराब बताकर कम दाम पर खरीदा जा रहा है। असलियत में नीलामी 2200 रुपये से शुरू की जा रही है और व्यापारी खुद ही फसल की ग्रेडिंग करके भाव तय कर रहे हैं। कम दाम में क्यों बेच रहे हैं किसान? • तुरंत नकद भुगतान: सरकारी खरीदी केंद्रों पर फसल बेचने के बाद पैसे आने में समय लगता है। वहीं, मंडी में फसल बेचने पर किसानों को 24 घंटे के अंदर नकद पैसा मिल जाता है। तुरंत पैसे की जरूरत के कारण किसान कम दाम पर भी मंडी में फसल बेच रहे हैं। • ट्रांसपोर्ट का खर्च: कई किसान दूर-दराज के गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर लेकर मंडी पहुंचते हैं। जब नीलामी में दाम कम मिलता है, तो वे फसल वापस घर ले जाने का रिस्क नहीं लेते क्योंकि इसमें किराया और समय दोनों बर्बाद होते हैं। ऐसे में जो भाव मिलता है, उसी पर फसल बेचना उनकी मजबूरी बन जाता है। सरकारी खरीदी केंद्रों का क्या है हाल? एक तरफ मंडियों में किसान परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्तर पर भी खरीदी जारी है। भोपाल में अब तक लगभग 452 किसानों से गेहूं खरीदा जा चुका है। इसके लिए 92 केंद्र बनाए गए हैं और करीब 37000 से ज्यादा किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) करवाया है। पिछले एक हफ्ते में सरकार 21000 क्विंटल गेहूं खरीद चुकी है। मंडी बोर्ड का क्या कहना है? इस मामले पर मंडी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस बार गेहूं का ‘मॉडल रेट’ पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम आ रहा है। यह औसतन 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने यह निर्देश जरूर दिए हैं कि नीलामी की प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही पूरी की जाए। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation MPSCSC: सरकारी अनाज की बोरियों की अब होगी डिजिटल ट्रैकिंग, सिलाई वाले QR टैग के लिए टेंडर जारी जीतू पटवारी को पुलिस ने रायसेन जाने से रोका, कृषि मेले में जाने की नहीं मिली अनुमति; कांग्रेस ने बताया ‘लोकतंत्र की हत्या’