मणिपुर हिंसा हाल ही फरवरी 2026 में राष्ट्रपति शासन हटाकर नई सरकार बनाई गई और युमनाम खेमचंद सिंह (BJP) नए मुख्यमंत्री बने। इस सरकार में कुकी समुदाय की विधायक नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाया गया। लेकिन कुछ ही घंटों में सरकार को जनता की तरफ़ से विरोध का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि 1. कुकी विधायकों का सरकार में शामिल होना (मुख्य वजह) फरवरी 2026 में राष्ट्रपति शासन हटाकर नई सरकार बनाई गई और युमनाम खेमचंद सिंह (BJP) नए मुख्यमंत्री बने। इस सरकार में कुकी समुदाय की विधायक नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाया गया, लेकिन कुकी-ज़ो समुदाय के कई बड़े संगठनों (जैसे ITLF या Kuki-Zo Council) ने अपने विधायकों को चेतावनी दी थी कि वे इम्फाल में बनने वाली किसी भी सरकार का हिस्सा न बनें। उनकी मांग है कि जब तक उन्हें “अलग प्रशासन” (Separate Administration) नहीं मिलता, वे मणिपुर सरकार का बहिष्कार करेंगे। •धोखाधड़ी का आरोप: जब नेमचा किपगेन और अन्य कुकी विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, तो चुराचांदपुर (Churachandpur) में प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने समुदाय के साथ “धोखा” माना। 2. विधायकों के घरों पर हमला शपथ ग्रहण के तुरंत बाद, चुराचांदपुर में गुस्साए लोगों ने उन कुकी विधायकों के घरों और दफ्तरों को निशाना बनाया जो सरकार में शामिल हुए थे। भीड़ का कहना था कि इन नेताओं ने समुदाय की ‘अलग व्यवस्था’ की मांग को कमजोर कर दिया है। इसी वजह से सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और हिंसा फिर से शुरू हो गई। कुकी-ज़ो समुदाय द्वारा “अलग प्रशासन” (Separate Administration) की मांग करने और राज्य सरकार को न मानने के पीछे गहरा अविश्वास (Trust Deficit) और सुरक्षा का डर है। यह मामला सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि पहचान और अस्तित्व का बन गया है। मुख्य वजह – 1. राज्य सरकार पर भरोसा नहीं (सबसे बड़ा कारण) कुकी समुदाय का आरोप है कि मणिपुर की राज्य सरकार निष्पक्ष नहीं है और वह केवल मैतेई समुदाय (जो इम्फाल घाटी में रहते हैं) के हितों के लिए काम करती है। • आरोप: उनका कहना है कि सरकार उन्हें नागरिक नहीं, बल्कि “घुसपैठिया” (illegal immigrants) या “नशा तस्कर” (narco-terrorists) के रूप में पेश करती है, जिससे उनकी सामाजिक छवि खराब होती है। • परिणाम: इसी अविश्वास के कारण वे इम्फाल से चलने वाली किसी भी व्यवस्था को मानने से इनकार करते हैं। उनका कहना है, “जब सरकार ही हमारे खिलाफ है, तो हम उस सरकार के अधीन कैसे रह सकते हैं?” 2. पुलिस और सुरक्षा बलों पर शक कुकी संगठनों का मानना है कि राज्य की पुलिस (Manipur Police) और कमांडो मैतेई समुदाय की तरफदारी करते हैं और हिंसा के दौरान उन पर ही हमला करते हैं। • मांग: वे चाहते हैं कि उनके इलाकों (पहाड़ी जिलों) में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य पुलिस के बजाय पूरी तरह से केंद्रीय बलों (जैसे सेना या असम राइफल्स) के पास हो। 3. बजट और विकास में भेदभाव मणिपुर की बनावट ऐसी है कि राजधानी (घाटी) में विकास ज़्यादा दिखता है, जबकि पहाड़ी इलाक़े पिछड़े हैं। • कुकी नेताओं का तर्क है कि राज्य का ज़्यादातर बजट इम्फाल घाटी में खर्च होता है और पहाड़ी आदिवासियों को उनके हक का पैसा नहीं मिलता। • उन्हें लगता है कि अगर उनका “अलग प्रशासन” (जैसे केंद्र शासित प्रदेश) होगा, तो उन्हें केंद्र से सीधा फंड मिलेगा और वे अपना विकास खुद कर पाएंगे। 4. ज़मीन का डर पहाड़ी जनजातियों को डर है कि अगर मैतेई समुदाय को भी एसटी (ST) का दर्जा मिल गया या सरकार ने नियमों में बदलाव किया, तो उनकी सुरक्षित ज़मीनों (Tribal Land) पर बाहरी लोग कब्ज़ा कर लेंगे। वे ‘अलग प्रशासन’ के ज़रिए अपनी ज़मीनों पर पूरा अधिकार सुरक्षित रखना चाहते हैं। आपकी क्या राय है हमें ज़रूर बताए Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation A call to people: If capitalism is to be fought, it has to be done in the mass India- America की नई ट्रेड डील हुई साइन ,भारत-अमेरिका के बीच ‘सदियों की सबसे बड़ी डील’ पर मुहर!