दिल्ली:

सदन में कल उस वक्त भारी हंगामा मच गया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महात्मा गांधी के एक पुराने सुझाव का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर जोरदार तंज कसा। शिवराज ने सदन में याद दिलाया कि आज़ादी के बाद गांधी जी खुद कांग्रेस को भंग (खत्म) करना चाहते थे। इस बयान के बाद विपक्ष, खासकर कांग्रेस के नेता, बुरी तरह भड़क गए और सदन में तीखी बहस छिड़ गई।

चर्चा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए इतिहास का वो पन्ना खोल दिया, जो कांग्रेस को हमेशा चुभता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी बहुत पहले ही समझ गए थे कि सत्ता में आने के बाद क्या होगा। इसलिए उन्होंने 1948 में ही यह साफ कह दिया था कि आज़ादी का लक्ष्य पूरा हो गया है, अब कांग्रेस को खत्म कर देना चाहिए।

शिवराज के इतना कहते ही विपक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया। कांग्रेसी नेताओं ने खड़े होकर इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति बताया। विपक्ष के भारी हंगामे के कारण सदन का माहौल काफी गर्म हो गया।

क्या है इतिहास का वह सच जिसका शिवराज ने किया जिक्र?

शिवराज सिंह चौहान ने जिस बात का जिक्र किया, वह ऐतिहासिक रूप से सच है।

• आखिरी इच्छा: 29 जनवरी 1948 को गांधी जी ने एक ड्राफ्ट तैयार किया था, जिसे उनका राजनीतिक वसीयतनामा भी कहा जाता है।

• लोक सेवक संघ का सुझाव: गांधी जी चाहते थे कि कांग्रेस को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में भंग कर दिया जाए और उसकी जगह ‘लोक सेवक संघ’ बनाया जाए।

• सेवा का लक्ष्य: उनका मानना था कि इस संघ का काम चुनाव लड़ना या सत्ता में बैठना नहीं, बल्कि गांवों में जाकर ज़मीनी स्तर पर जनता की सेवा करना होना चाहिए।

गांधी जी की हत्या के बाद उस समय के कांग्रेसी नेताओं ने इस सुझाव को नहीं माना और कांग्रेस एक राजनीतिक दल के रूप में काम करती रही। सदन में शिवराज सिंह चौहान ने इसी इतिहास को याद दिलाकर कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख दिया।

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