नई दिल्ली: लोकसभा

संसद के बजट सत्र के दौरान आज एक बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का नोटिस दिया है। इस नोटिस पर कांग्रेस, डीएमके, एनसीपी (शरद पवार गुट) और सपा समेत कई विपक्षी दलों के कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

क्या है विपक्ष का आरोप?

विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन का संचालन करते समय निष्पक्ष नहीं रहते। उनका कहना है कि विपक्षी सांसदों को बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया जाता और कई बार उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं। हाल ही में राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोकने को लेकर भी विपक्ष में भारी नाराजगी थी, जो इस प्रस्ताव का तात्कालिक कारण बना।

राहुल गांधी ने हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खुद नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी ने इस अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, यह एक सोची-समझी रणनीति है। चूंकि ‘नेता प्रतिपक्ष’ एक संवैधानिक पद है, इसलिए संसदीय परंपराओं का पालन करते हुए राहुल गांधी ने खुद को इस प्रक्रिया से तकनीकी रूप से अलग रखा है, ताकि इसे स्पीकर बनाम राहुल गांधी की व्यक्तिगत लड़ाई न बनाया जा सके।

अब आगे क्या होगा?

नियमों के मुताबिक, अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के बाद 14 दिनों के भीतर इसे सदन में चर्चा के लिए लिया जा सकता है। जब इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी, तब ओम बिरला स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठ सकेंगे। हालांकि, संख्या बल (Numbers) के हिसाब से देखें तो एनडीए (NDA) के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए स्पीकर को हटाना विपक्ष के लिए संभव नहीं होगा, लेकिन इसके जरिए विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

सबसे खास बात यह है कि-

ओम बिरला ने ख़ुद के ख़िलाफ़ जाँच को तेज करने के लिए कहा

error: Content is protected !!