चुनावों में वोट बटोरने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त की योजनाएं (Freebies) बांटने के चलन पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारी कर्ज में डूबे होने के बावजूद मुफ्त की सौगातें बांटने वाली राज्य सरकारों को अदालत ने फटकार लगाई है।

कोर्ट की टिप्पणी में स्पष्ट कहा गया है कि राज्यों को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के बजाय ऐसे ठोस विकास कार्यों और योजनाओं पर पैसा खर्च करना चाहिए, जिनसे आम जनता के जीवन स्तर में स्थायी सुधार आ सके।

इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले चुनावों में पार्टियों के घोषणापत्रों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

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