नई दिल्ली।

देश में महिला आरक्षण (Women’s Reservation) के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी को ‘यू-टर्न उस्ताद’ करार दिया है।

पीएम मोदी पर ‘यू-टर्न’ लेने का आरोप

जयराम रमेश ने याद दिलाया कि जब सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) पास हुआ था, तब सरकार ने एक बड़ी शर्त रखी थी। सरकार का कहना था कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तभी मिलेगा जब देश में नई जनगणना (Census) और चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation) पूरा हो जाएगा।

रमेश का आरोप है कि अब अचानक सरकार बिना जनगणना और परिसीमन के ही आरक्षण लागू करने के संकेत दे रही है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार का सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ बताया है।

‘WMD’ का जिक्र और ध्यान भटकाने का आरोप

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर जनता का ध्यान भटकाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने अपने बयान में “Weapons of Mass Diversion” (WMD) शब्द का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि जब भी सरकार महंगाई, बेरोजगारी या अन्य असल मुद्दों पर घिरती है, तो वह ऐसे राजनीतिक हथकंडे अपनाती है ताकि जनता का ध्यान भटकाया जा सके।

कांग्रेस की मुख्य मांगें क्या हैं?

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार के सामने कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं:

तुरंत बुलाई जाए सर्वदलीय बैठक: कांग्रेस ने मांग की है कि महिला आरक्षण को जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा, इसका रोडमैप स्पष्ट करने के लिए पीएम मोदी को तुरंत सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलानी चाहिए।

ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग कोटा: कांग्रेस लगातार इस बात पर जोर दे रही है कि महिला आरक्षण के अंदर ही ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोटा तय किया जाना चाहिए, जो कि वर्तमान बिल में नहीं है। पार्टी ने इसे महिलाओं के साथ ‘धोखा’ और ‘चुनावी जुमला’ भी बताया है।

आगे क्या ?

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, महिला आरक्षण का यह मुद्दा और भी गरमा सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार और सत्ताधारी पार्टी, कांग्रेस के इन तीखे सवालों और सर्वदलीय बैठक की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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