नई दिल्ली/भोपाल:

देशभर में आजकल बैंक लॉकर से सोना चोरी होने और एफडी (FD) का पैसा गायब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिस बैंक को हम सुरक्षा की सबसे मजबूत जगह मानते थे, अब वही सवालों के घेरे में है। हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत या सुरक्षा में चूक के कारण ग्राहकों की जीवन भर की कमाई पल भर में साफ हो गई।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है—अगर आपके लॉकर से लाखों का सोना चोरी हो जाए, तो क्या बैंक आपको उसकी पूरी कीमत देगा? जवाब आपको चौंका सकता है और डरा भी सकता है।

RBI का नियम: राहत या धोखा?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2022 में लॉकर को लेकर नए नियम लागू किए थे। इसके मुताबिक, अगर बैंक की लापरवाही, आग, चोरी या डकैती के कारण लॉकर के सामान का नुकसान होता है, तो बैंक को ग्राहक को लॉकर के सालाना किराए का 100 गुना मुआवजा देना होगा।

सुनने में यह बहुत अच्छा लगता है, लेकिन जरा इसका गणित समझिए।

क्या 100 गुना मुआवजा काफी है? (अहम सवाल)

यही वो पॉइंट है जहां एक आम आदमी या गरीब परिवार को सबसे बड़ा झटका लगता है।

मान लीजिए, एक किसान या मध्यम वर्गीय परिवार ने अपनी बेटी की शादी के लिए या बुरे वक्त के लिए पुश्तैनी जेवर बैंक लॉकर में रखे।

• सोने की कीमत: मान लेते हैं कि लॉकर में 15 लाख रुपये का सोना रखा था।

• लॉकर का किराया: छोटे शहरों या ग्रामीण बैंकों में लॉकर का सालाना किराया लगभग 2,000 से 3,000 रुपये होता है।

• मुआवजा (नियम के अनुसार): 3,000 (किराया) x 100 = 3 लाख रुपये।

नतीजा: ग्राहक का नुकसान 15 लाख का हुआ, लेकिन बैंक उसे नियम का हवाला देकर सिर्फ 3 लाख रुपये थमा देगा।

अब सवाल यह है कि बाकी के 12 लाख रुपये का नुकसान कौन भरेगा? क्या यह नियम उस गरीब के साथ न्याय है जिसने पाई-पाई जोड़कर वो सोना बनाया था?

बैंक कर्मचारियों की धोखाधड़ी पर क्या?

सिर्फ लॉकर ही नहीं, बैंक कर्मचारियों द्वारा FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) से पैसा निकालने के मामले भी सामने आए हैं। कई बार बैंक के ही लोग बुजुर्गों या कम पढ़े-लिखे लोगों के खातों से रकम उड़ा ले जाते हैं। हालांकि ऐसे मामलों में बैंक को पूरा पैसा ब्याज सहित वापस करना होता है, लेकिन इसकी कानूनी लड़ाई इतनी लंबी होती है कि पीड़ित व्यक्ति अदालतों के चक्कर काटते-काटते थक जाता है।

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि लॉकर एग्रीमेंट में बदलाव की जरूरत है।

1. बैंक लॉकर इंश्योरेंस: ग्राहकों को अपने कीमती सामान का अलग से बीमा करवाना चाहिए, क्योंकि बैंक लॉकर के अंदर रखे सामान का बीमा नहीं करता।

2. डिजिटल सतर्कता: अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखें और समय-समय पर बैंक जाकर अपने खाते और लॉकर की जांच करते रहें।

निष्कर्ष:

सरकार और RBI को इस नियम पर फिर से विचार करना चाहिए। “किराए का 100 गुना” मुआवजा उन लोगों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई उस लोहे की तिजोरी के भरोसे छोड़ दी थी। जब तक नियम नहीं बदलते, सतर्क रहना ही एकमात्र बचाव है।

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