नई दिल्ली, 10 मार्च 2026: व्यापार की दुनिया का सबसे बड़ा बदलाव – कर्ज, कंपनियां और नया कानून! नमस्कार! आज संसद के हंगामे के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, बैंकों और व्यापार पर पड़ेगा। आज कैबिनेट ने ‘कंपनी एक्ट’ और ‘दिवालियापन कानून’ (Insolvency Law) में कुछ बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। लेकिन यह खबर इतनी बड़ी क्यों है? इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा और देखना होगा कि पहले जब कोई कंपनी डूबती थी तो क्या होता था, और अब क्या होता है। आइए इस स्पेशल रिपोर्ट में पूरी कहानी समझते हैं: फ्लैशबैक: 2016 से पहले क्या होता था? (जब सिस्टम बेबस था) आज से करीब 10 साल पहले, अगर कोई कंपनी बैंकों का करोड़ों का कर्ज लेकर दिवालिया (Bankrupt) हो जाती थी, तो हालात बहुत खराब होते थे: • तारीख पर तारीख: कर्ज वसूली के लिए कोई एक कानून नहीं था। मामले अलग-अलग कोर्ट में 5 से 10 साल तक लटके रहते थे। • मालिक की मौज: सबसे बड़ी हैरानी की बात यह थी कि कंपनी डूबने के बाद भी उसका कंट्रोल उसी पुराने मालिक के पास रहता था, जिसने कर्ज नहीं चुकाया। वो सालों तक कोर्ट में केस खींचता था और तब तक कंपनी का बचा-खुचा पैसा भी गायब कर देता था। • बैंकों का भारी नुकसान: सालों केस चलने के बाद जब कंपनी की मशीनें या संपत्ति कबाड़ हो जाती थी, तब बैंकों को अपने दिए हुए कर्ज का मुश्किल से 20 से 25% पैसा ही वापस मिल पाता था। गेम चेंजर: 2016 का नया कानून (IBC) इस पुरानी बीमारी को खत्म करने के लिए सरकार 2016 में ‘इनसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड’ (IBC) यानी नया दिवालियापन कानून लेकर आई। इसने पूरा खेल ही बदल दिया: • कंट्रोल आउट: अब जैसे ही कंपनी दिवालिया घोषित होती है, पुराने मालिक को तुरंत कुर्सी से हटा दिया जाता है। कंपनी का सारा कंट्रोल बैंकों और एक एक्सपर्ट के हाथ में आ जाता है। • तय समय सीमा: अब केस सालों नहीं चलते। कानून के तहत पूरी प्रक्रिया को खत्म करने के लिए अधिकतम 330 दिन का समय तय कर दिया गया है। • बेहतर रिकवरी: अब कंपनियों को कबाड़ होने से पहले ही या तो बचा लिया जाता है, या उसे बेचकर बैंकों का ज्यादा से ज्यादा पैसा वापस निकाल लिया जाता है। आज की खबर: अब नया बदलाव क्यों? भले ही 2016 के कानून ने बहुत सुधार किया, लेकिन फिर भी कुछ मामलों में देरी हो रही थी। इसलिए, आज कैबिनेट ने इस कानून और 2013 के ‘कंपनी एक्ट’ को और ज्यादा धारदार बनाने के लिए नए बदलावों को मंजूरी दी है: • और तेज़ फैसले: अब दिवालिया कंपनियों के केस और भी ज्यादा स्पीड से सुलझाए जाएंगे ताकि बैंकों का पैसा जल्दी फ्री हो सके। • नए व्यापार में आसानी: ‘कंपनी एक्ट’ को आसान किया जा रहा है ताकि नई कंपनियों को अपना काम शुरू करने में कम कागजी कारवाई करनी पड़े। कुल मिलाकर, सरकार का संदेश साफ है—ईमानदारी से व्यापार करने वालों के लिए रास्ते आसान होंगे, लेकिन बैंकों का पैसा डुबाने वालों को अब कोई कानून नहीं बचा पाएगा। जब यह नया बिल संसद में पेश होगा, तो देखना दिलचस्प होगा कि इसमें और क्या-क्या नए नियम निकलकर सामने आते हैं। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation संसद की कार्यवाही ठप: जनता के पैसों और समय का भारी नुकसान LPG गैस संकट का सच – भंडार फुल है, पर लोगों का डर बढ़ा रहा है किल्लत