देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी की चर्चाओं के बीच एक नया खेल शुरू हो गया है। कुछ दलाल और मुनाफाखोर सस्ते रेट पर ईंधन की भारी मात्रा खरीदकर स्टॉक कर रहे हैं, ताकि भविष्य में दाम बढ़ने पर मोटा मुनाफा कमा सकें। वहीं दूसरी तरफ, आम जनता को पेट्रोल पंपों पर “स्टॉक खत्म” होने का बहाना बताकर वापस लौटाया जा रहा है। क्या है यह पूरा खेल? बाजार में इस समय पेट्रोल और डीजल की कोई वास्तविक कमी नहीं है, लेकिन दलालों ने अपने निजी फायदे के लिए इसे एक ‘कृत्रिम संकट’ (Artificial Scarcity) बना दिया है। इसके पीछे की रणनीति बहुत साफ है: • सस्ते में स्टॉक करना: मुनाफाखोर मौजूदा रेट पर बड़ी मात्रा में तेल खरीद कर अपने पास जमा कर रहे हैं। • जनता से झूठ: जब आम आदमी अपनी गाड़ी में तेल भरवाने पंप पर जाता है, तो उसे बताया जाता है कि पीछे से सप्लाई नहीं आ रही है। • कालाबाजारी की तैयारी: इनका मुख्य मकसद यह है कि जैसे ही तेल की कीमतें 2 या 4 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ेंगी, वे इसी जमा किए गए स्टॉक को महंगे दामों पर बेचेंगे। आम आदमी की बढ़ी परेशानी रोजाना अपने काम पर जाने वाले नौकरीपेशा लोग, किसान और व्यापारी इस कालाबाजारी का सीधा शिकार हो रहे हैं। कई जगह लोगों को तेल के लिए 10 से 15 किलोमीटर दूर दूसरे पंपों पर भटकना पड़ रहा है। किसानों को ट्रैक्टर और मशीनों के लिए डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन को एक्शन करना होगा तेज़ ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग को तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है। अधिकारियों को पेट्रोल पंपों पर जाकर उनके स्टॉक रजिस्टर की औचक जांच (Surprise Checking) करनी चाहिए। जनता के हक का तेल रोककर मुनाफा कमाना गैरकानूनी है और जो लोग भी इस कालाबाजारी में शामिल पाए जाएं, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation होटलों की मनमानी पर सरकार का एक्शन: खाने के बिल में अब नहीं जुड़ेगा गैस और ईंधन का चार्ज जनता का दर्द समझते हैं पीएम मोदी: मुश्किल वक्त में भी देशवासियों को महंगे तेल की मार से बचाया।