भोपाल/दतिया: दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों पर आज पूरे मध्य प्रदेश की नज़रें टिकी हैं। यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश संगठन की साख की सबसे बड़ी परीक्षा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरज़ोर चर्चा है कि अगर चौतरफा विरोध और कांग्रेस की पारंपरिक रूप से मजबूत पकड़ के बावजूद बीजेपी यहाँ कमल खिलाने में कामयाब होती है, तो यह मुख्यमंत्री मोहन यादव और वीडी शर्मा/खंडेलवाल (संगठन) की अब तक की सबसे बड़ी सियासी कामयाबी मानी जाएगी। क्यों बड़ी कामयाबी होगी बीजेपी की जीत? एंटी-इंकंबेंसी और विरोध की दीवार: इस चुनाव में बीजेपी को न सिर्फ विपक्ष के हमलों का सामना करना पड़ा, बल्कि स्थानीय स्तर पर अंदरूनी असंतोष और विरोध की लहर से भी दो-चार होना पड़ा। कांग्रेस का मजबूत गढ़: यह सीट कांग्रेस के प्रभाव वाली मानी जा रही थी, जहाँ विपक्ष ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी। मोहन-खंडेलवाल की रणनीति की जीत: अगर यहाँ बीजेपी जीतती है, तो इसका सीधा मतलब होगा कि सीएम मोहन यादव का प्रशासनिक जादू और संगठन की चुनावी माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति पूरी तरह सफल रही। यह जीत उनके नेतृत्व पर मुहर लगा देगी। दूसरी तरफ: हार का मतलब, बैकफुट पर बीजेपी राजनीति में ‘इफ और बट’ का खेल हमेशा चलता है। अगर तमाम दावों के बाद भी बीजेपी इस सीट को गंवा देती है, तो पार्टी के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। इस हार से न सिर्फ बीजेपी बैकफुट पर आ जाएगी, बल्कि विरोधियों को सरकार की नीतियों और संगठन की रणनीति पर सवाल उठाने का एक बड़ा मौका मिल जाएगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation मध्य प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस की बड़ी क्रांति: अब 181 हेल्पलाइन पर कॉल कर WhatsApp पर पाएं आय और जाति प्रमाण पत्र दतिया उपचुनाव: शुरुआती बढ़त के बाद पलटा पासा, कांग्रेस के घनश्याम सिंह की बढ़त 9000पार; जीत का दावा