पटना: सोशल मीडिया और देश की कोचिंग इंडस्ट्री में इस समय सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है—खान सर (Khan Sir)। पटना में उनके कोचिंग सेंटर ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ (Khan Global Studies) के बाहर हुई तोड़फोड़ और उसके बाद उनके गार्ड्स द्वारा की गई हवाई फायरिंग के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए खान सर के दोनों गार्ड्स को गिरफ्तार कर लिया और खुद खान सर के खिलाफ भी FIR दर्ज कर ली है।

कानूनन सड़क पर इस तरह फायरिंग करना गलत है और पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने देश के कानून और सिस्टम के दोहरे रवैये पर एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि जब खान सर के गार्ड्स ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, तो कानून तुरंत जाग गया। लेकिन इसी देश में हर साल, हर दिन हजारों शादियों और बारातों में रसूखदार लोग टशन दिखाने के लिए खुलेआम ‘हर्ष फायरिंग’ (Harsh Firing) करते हैं, तब यह कानून और पुलिस कहां सो जाती है?

1. खान सर का मामला: जब मजबूरी में चली गोली, तो तुरंत हुई FIR

पटना में जो हुआ, उसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। एक नामी कोचिंग संस्थान के उकसावे पर भीड़ आती है, पत्थरबाजी करती है और दफ्तर की खिड़कियां-दरवाजे तोड़ देती है। वहां मौजूद स्टाफ की जान पूरी तरह खतरे में थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को फोन किया गया, लेकिन पुलिस वक्त पर नहीं पहुंची।

ऐसे में अपनी और अपने स्टाफ की जान बचाने के लिए, यानी ‘सेल्फ-डिफेंस’ (Right to Self-Defense) में खान सर के प्राइवेट गार्ड्स ने हवा में गोलियां चलाईं ताकि भीड़ को डराकर भगाया जा सके। कानून कहता है कि यह लापरवाही है, और पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए गार्ड्स को जेल भेज दिया और उनके बयान के आधार पर खान सर को भी सह-आरोपी बना दिया। चलिए मान लेते हैं कि कानून सबके लिए बराबर है, लेकिन क्या जमीनी हकीकत भी यही है?

2. शादियों की ‘हर्ष फायरिंग’: शौक के लिए चलती हैं गोलियां, फिर भी पुलिस मौन क्यों?

अब जरा सिक्के का दूसरा पहलू देखिए, जिससे देश का हर आम नागरिक रोज दो-चार होता है। देश के हर राज्य में, हर दिन शादियों के सीजन में रसूखदार, नेता और दबंग लोग शराब के नशे में धुत होकर अपनी बंदूकों से सरेआम हवा में दर्जनों राउंड फायरिंग करते हैं।

 2019 का सख्त कानून सिर्फ कागजों पर? साल 2019 में सरकार ने आर्म्स एक्ट (Arms Act) में बदलाव करके साफ कहा था कि शादी-ब्याह या किसी भी उत्सव में हवाई फायरिंग करने पर 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना होगा, साथ ही हथियार का लाइसेंस भी हमेशा के लिए रद्द होगा।

 पहचान होने के बाद भी एक्शन क्यों नहीं? आज के डिजिटल दौर में शादियों के वीडियो बनाने के लिए कैमरामैन होते हैं। रसूखदार लोग खुद बंदूकों के साथ रील्स (Reels) बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं। इन वीडियो में उनके चेहरे साफ दिखते हैं, बंदूकों के नंबर तक ट्रैक किए जा सकते हैं। फिर पुलिस स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर इन पर FIR क्यों नहीं दर्ज करती? आज तक कितने रसूखदारों के लाइसेंस रद्द हुए और कितने जेल गए?

3. यह कैसा दोहरा मापदंड? जनता पूछ रही है सवाल

आज देश की जनता और सोशल मीडिया यूजर्स पुलिस प्रशासन से दो सीधे सवाल पूछ रहे हैं:

खान सर का मामला ( जब बात विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए चलायी गई थी गोली)

इस मामले में पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। FIR दर्ज हुई, गार्ड्स की गिरफ्तारी हुई और उन पर कड़ी धाराएं लगाई गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हमला ऑन-कैमरा था और मामला हाई-प्रोफाइल था।

 शादियों की फायरिंग (जब सिर्फ टशन और रसूख का खेल होता है):

इस मामले में पुलिस अक्सर अनजान बनी रहती है। जब तक कोई बड़ी दुर्घटना या मौत न हो जाए, पुलिस कोई एक्शन नहीं लेती। इसके पीछे असली वजह रसूखदारों का राजनीतिक दबाव और बाद में होने वाला आपसी राजीनामा है।

शादियों में किसी की जान का खतरा नहीं होता, वहां सिर्फ अपनी धौंस जमाने के लिए गोलियां चलती हैं, जिसमें हर साल कई मासूम बाराती या नाचने वाले बच्चे अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन वहां पुलिस तब तक नहीं पहुंचती, जब तक कि कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए। और दुर्घटना होने के बाद भी, पैसे और रसूख के दम पर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जाती है।

कानून का डंडा सिर्फ सीधे लोगों पर क्यों?

कानून की किताब में साफ लिखा है कि “कानून की नजर में सब बराबर हैं।” लेकिन जमीन पर नजारा कुछ और ही बयां करता है। अगर पुलिस सोशल मीडिया के वीडियो और बयानों को देखकर खान सर के मामले में इतनी मुस्तैदी दिखा सकती है, तो शादियों में सरेआम कानून की धज्जियां उड़ाने वाले इन ‘दबंगों’ के वीडियो पर पुलिस की आंखें क्यों बंद हो जाती हैं?

क्या हमारा सिस्टम सिर्फ उन लोगों पर डंडा चलाना जानता है जो कानून का सम्मान करते हैं या जो चर्चा में रहते हैं? रसूखदारों को इस कानून का डर आखिर कब सताएगा? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आज हर नागरिक जानना चाहता है।

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