​विशेष रिपोर्ट | नई दिल्ली/मुंबई

​मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़े तेवर दिखाए हैं। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ज्ञानेश कुमार के पद से हटने को लेकर कोई ठोस आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया, तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से मुंबई की सड़कों से एक बड़ा देशव्यापी जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।

​26 सितंबर की डेडलाइन खत्म, अब सड़क पर उतरने की तैयारी

सोशल मीडिया पर साझा किए गए ताजा बयान में अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन अपने तय कार्यक्रम पर पूरी तरह अडिग है। उन्होंने कहा कि आवाज वही सबसे मजबूत होती है जो सत्य और शांति के रास्ते पर चले। मुंबई में होने वाले इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए स्थान, समय और आगे की रूपरेखा जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।

​विवाद की मुख्य वजह क्या है?

यह पूरा टकराव स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में कथित बड़े फेरबदल के बाद शुरू हुआ है।

  • ​करोड़ों वोटरों के नाम हटाने का आरोप: CJP का दावा है कि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम गायब किए गए हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र और आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार है।
  • ​अल्टीमेटम और जवाबदेही की मांग: संगठन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की मांग की थी।
  • ​‘जंतर-मंतर 2.0’ की चेतावनी: मुंबई से शुरू होने वाले इस आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में फैलाने और राजधानी दिल्ली तक ले जाने की योजना है।

​प्रशासन और विपक्षी खेमे में हलचल

महाराष्ट्र में कई विपक्षी संगठन भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और चुनाव आयोग इस दबाव के आगे कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हैं या फिर यह विरोध प्रदर्शन एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेगा।

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