मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) का एक ऐसा बड़ा कारनामा सामने आया है, जिससे पूरे शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। विभाग ने राज्य के सरकारी कॉलेजों में पढ़ाने वाले प्रोफेसर्स की जो नई वरिष्ठता सूची (Seniority List) जारी की है, उसमें इतनी बड़ी गलतियां हैं कि यह पूरे प्रदेश में मजाक का विषय बन गई है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, विभाग ने करीब 5 साल के लंबे इंतजार के बाद राज्य स्तर पर प्रोफेसर्स के प्रमोशन और ट्रांसफर के लिए यह लिस्ट तैयार की थी। लेकिन जब लिस्ट पब्लिक हुई, तो पता चला कि इसमें ऐसे 40 से ज्यादा प्रोफेसर्स के नाम शामिल हैं, जिनका 2 से 3 साल पहले ही निधन हो चुका है। यही नहीं, लिस्ट में उन लोगों को भी अच्छी रैंकिंग दी गई है, जो पिछले 10 सालों में रिटायर हो चुके हैं।

सीनियर को बना दिया जूनियर:

लापरवाही की हद तो तब पार हो गई जब लिस्ट में कई मौजूद सीनियर प्रोफेसर्स की पोस्ट ही घटा दी गई। उदाहरण के लिए, भोपाल के एक कॉलेज में पिछले 25 सालों से पढ़ा रहे एक सीनियर प्रोफेसर को लिस्ट में ‘असिस्टेंट प्रोफेसर’ (Assistant Professor) बता दिया गया है। कुल मिलाकर पूरी लिस्ट में 400 से ज्यादा विसंगतियां (गलतियां) पाई गई हैं।

प्रोफेसर्स एसोसिएशन की चेतावनी:

इस बड़ी गड़बड़ी के बाद ‘मध्य प्रदेश प्राध्यापक संघ’ (Professors Association) ने कड़ी आपत्ति जताई है। संघ के अध्यक्ष ने कहा है कि यह लिस्ट शिक्षा विभाग के अधिकारियों के काम करने के तरीके की पोल खोलती है। उन्होंने मांग की है कि इस लिस्ट को तुरंत रद्द किया जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर 3 दिन के अंदर नई और सही लिस्ट नहीं आई, तो वे 20 मार्च से पूरे प्रदेश में हड़ताल पर चले जाएंगे।

इस बीच, शिक्षा मंत्री ने मामले पर सफाई देते हुए इसे ‘तकनीकी खराबी’ (Technical Glitch) बताया है और 3 सदस्यों की एक जांच कमेटी बना दी है।

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