भोपाल | मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की परीक्षाओं का अचानक रद्द या स्थगित होना अब केवल एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ बन चुका है। हाल ही में वन रक्षक, क्षेत्र रक्षक और जेल प्रहरी जैसी परीक्षाओं के दौरान सामने आई अव्यवस्था और सर्वर क्रैश ने एक बार फिर सरकार और परीक्षा कराने वाले सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। आखिर क्यों हमारा सिस्टम इतना कमजोर है? क्या हैं इसके पीछे के मुख्य कारण और इसका समाधान क्या हो सकता है? पढ़िए यह विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: 1. सरकार और सिस्टम की 3 सबसे बड़ी कमजोरियां आउटसोर्सिंग और प्राइवेट एजेंसियों पर अत्यधिक निर्भरता सरकारी स्तर पर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण परीक्षा आयोजित करने का जिम्मा प्राइवेट टेक कंपनियों को सौंप दिया जाता है। इन कंपनियों के पास अक्सर मजबूत और सुरक्षित सर्वर नहीं होते। भारी ट्रैफिक (एक साथ लाखों बच्चों का लॉगिन होना) संभाल न पाने के कारण ऐन वक्त पर सिस्टम क्रैश हो जाता है। जवाबदेही और सख्त निगरानी का अभाव जब भी कोई परीक्षा रद्द होती है, तो उसे ‘तकनीकी खराबी’ का नाम देकर टाल दिया जाता है। अधिकारियों या परीक्षा कराने वाली एजेंसी के बड़े पदों पर बैठे लोगों पर कोई सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक लापरवाही का यह सिलसिला थमेगा नहीं। साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में पुरानापन आज के डिजिटल युग में जहां हैकर्स और दलाल नए-नए तरीके अपना रहे हैं, वहीं MPESB का डिजिटल सिक्योरिटी सिस्टम अब भी पुराना और कमजोर है। सर्वर का अचानक बैठ जाना यह साबित करता है कि बैकअप और लोड-टेस्टिंग जैसी बुनियादी चीजों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 2.बच्चों के भविष्य के साथ क्यों हो रहा है खिलवाड़? उम्र का निकलना (Age Bar): सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के पास समय सीमित होता है। एक परीक्षा रद्द होने और दोबारा होने में महीनों या सालों लग जाते हैं। इस बीच कई होनहार छात्र ओवर-एज (उम्र सीमा पार) हो जाते हैं। आर्थिक और मानसिक शोषण: ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चे पेट काटकर, कर्ज लेकर भोपाल-इंदौर जैसे शहरों में कोचिंग की फीस और कमरों का किराया भरते हैं। परीक्षा रद्द होने से उनका मनोबल पूरी तरह टूट जाता है और वे मानसिक तनाव (Depression) का शिकार हो रहे हैं। सिस्टम से उठता भरोसा: बार-बार होने वाली इन गड़बड़ियों के कारण अब युवाओं का मेहनत पर से भरोसा उठने लगा है। उन्हें लगने लगा है कि ईमानदारी से पढ़ाई करने के बाद भी समय पर नौकरी मिलना मुमकिन नहीं है। 3. क्या है इस समस्या का ठोस उपाय? यदि सरकार वाकई इस लाचार व्यवस्था को सुधारना चाहती है, तो उसे तुरंत ये 4 कदम उठाने होंगे: 1. खुद का सरकारी नेशनल/स्टेट डाटा सेंटर हो: परीक्षा कराने के लिए पूरी तरह से प्राइवेट कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय सरकार को नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) या उच्च स्तरीय सरकारी तकनीकी संस्थाओं के साथ मिलकर एक मजबूत, सुरक्षित और हाई-कैपेसिटी सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना चाहिए। 2. कड़ा कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट: परीक्षा में गड़बड़ी या लापरवाही बरतने वाली कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज हो और भारी जुर्माने के साथ ब्लैकलिस्ट किया जाए। इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए 3 महीने के भीतर सजा का प्रावधान हो। 3. फुल-प्रूफ बैकअप प्लान: यदि किसी शिफ्ट का सर्वर डाउन होता है, तो उसके लिए तुरंत एक ‘मिरर सर्वर’ या बैकअप सिस्टम तैयार होना चाहिए, ताकि परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने के बजाय कुछ समय की देरी से शुरू किया जा सके। 4. छात्रों को मुआवजा मिले: यदि सरकार या एजेंसी की गलती के कारण परीक्षा रद्द होती है, तो दूर-दूर से आए छात्रों को उनके आने-जाने का किराया और मानसिक परेशानी का हर्जाना (मुआवजा) दिया जाना चाहिए। इससे सिस्टम पर सही काम करने का दबाव बनेगा। युवा देश का भविष्य होते हैं, लेकिन जब भविष्य बनाने वाली मशीनरी (सिस्टम) ही जंग खाई हो, तो विकास की बातें बेमानी लगती हैं। सरकार को अब ‘कड़े रुख’ की बयानबाजी से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर एक पारदर्शी और अचूक परीक्षा प्रणाली (Full-Proof Exam System) का निर्माण करना ही होगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation सिलवानी मूंग चोरी कांड: क्या ‘सरकारी चाबी’ के पीछे छुपा है 75 लाख के घोटाले का असली मास्टरमाइंड? भोपाल के 5-स्टार होटल ‘कोर्टयार्ड बाय मैरियट’ के किचन में चूहे मिलने पर फूड लाइसेंस सस्पेंड