रेपो रेट 5.25% से बढ़कर हुआ 5.50%, बैंक कर्ज होंगे महंगे और जमाकर्ताओं को मिलेगा ज्यादा ब्याज  

नई दिल्ली / भोपाल :

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी ताजा समीक्षा बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25% की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद देश में रेपो रेट पहले के 5.25% से बढ़कर अब 5.50% हो गया है। रिजर्व बैंक के इस कदम से उन सभी लोगों को अपनी कमर कसनी होगी जिनके विभिन्न बैंकों में होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन या बिजनेस लोन चल रहे हैं। कमर्शियल बैंकों की उधारी दरें बढ़ने से ग्राहकों की मासिक ईएमआई बढ़ जाएगी। हालांकि, बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट रखने वाले आम नागरिकों और वरिष्ठ नागरिकों को इस फैसले से जमा पर अधिक रिटर्न का सीधा फायदा मिलेगा।  

पहले क्या थी स्थिति और अब क्या बदला

 पहले रेपो रेट: 5.25%  

 बढ़ोतरी: 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट

 अब नया रेपो रेट: 5.50%  

जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा पड़ता है। बैंक इस बढ़ी हुई लागत की भरपाई ग्राहकों के फ्लोटिंग रेट वाले कर्जों की ब्याज दरें बढ़ाकर करते हैं।

बड़ा झटका: 10 लाख के लोन पर कितना बढ़ेगा वित्तीय बोझ

यदि आपका किसी भी बैंक से 10 लाख रुपये का लोन चल रहा है या आप नया कर्ज लेने जा रहे हैं, तो 0.25% ब्याज बढ़ने पर आपकी जेब पर यह असर पड़ेगा:

 10 लाख रुपये का होम लोन 15 साल के लिए:

 पुरानी ब्याज दर 8.50% के हिसाब से मासिक ईएमआई: ₹9,847

 नई ब्याज दर 8.75% होने के बाद संशोधित ईएमआई: ₹9,995

 मासिक असर: हर महीने ₹148 जेब से ज्यादा कटेंगे।

 कुल अतिरिक्त वित्तीय भार: पूरे 15 साल की अवधि में ग्राहक को लगभग ₹26,640 का अतिरिक्त ब्याज बैंक को चुकाना होगा।

 10 लाख रुपये का कार या पर्सनल लोन 5 साल के लिए:

 पुरानी ब्याज दर 10.00% के हिसाब से मासिक ईएमआई: ₹21,247

 नई ब्याज दर 10.25% होने के बाद संशोधित ईएमआई: ₹21,370

 मासिक असर: प्रति माह ₹123 अधिक देने होंगे।

 कुल अतिरिक्त वित्तीय भार: 5 वर्षों में ब्याज का कुल अतिरिक्त बोझ लगभग ₹7,380 बढ़ जाएगा।

बड़ी राहत: 10 लाख की बैंक एफडी पर होगी बंपर कमाई

लोन धारकों के लिए भले ही यह खबर चिंताजनक हो, लेकिन बैंक में पूंजी सुरक्षित रखकर ब्याज कमाने वाले आम जमाकर्ताओं और पेंशनरों के लिए यह बेहतरीन मौका है। रेपो रेट बढ़ने के बाद सभी बैंक अपनी सावधि जमा दरों में इजाफा करेंगे।

 10 लाख रुपये की बैंक एफडी 3 साल की अवधि के लिए:

 पुरानी ब्याज दर 7.00% पर कुल रिटर्न: लगभग ₹12,31,439

 नई ब्याज दर 7.25% पर कुल रिटर्न: लगभग ₹12,40,548

 शुद्ध मुनाफा: 3 साल का समय पूरा होने पर जमाकर्ता को बिना किसी बाजार जोखिम के लगभग ₹9,109 का अतिरिक्त शुद्ध लाभ मिलेगा।

 वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य दरों के मुकाबले 0.50% तक अतिरिक्त ब्याज मिलता है, जिससे उनका कुल रिटर्न और भी अधिक होगा।

आरबीआई ने क्यों लिया यह फैसला

केंद्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य देश में खुदरा महंगाई दर को नियंत्रित रखना है। जब बाजार में नकदी का प्रवाह कम होता है, तो मांग घटती है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें स्थिर होने में मदद मिलती है।

कर्जदारों के लिए जरूरी सलाह

 ईएमआई बढ़वाएं, समयसीमा नहीं: बैंक अक्सर किस्त की राशि बढ़ाने के बजाय लोन का टेन्योर यानी चुकाने की अवधि बढ़ा देते हैं। ग्राहक कोशिश करें कि अपनी मासिक किस्त थोड़ी बढ़वा लें, क्योंकि टेन्योर बढ़ाने से कुल ब्याज काफी अधिक भरना पड़ता है।

 पार्ट पेमेंट करें: यदि आपके पास कोई अतिरिक्त फंड या बचत आती है, तो लोन के मूलधन का कुछ हिस्सा समय से पहले चुकाएं ताकि कुल ब्याज का दबाव कम हो सके।

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