‘सक्षम कब्जाधारियों के लिए घड़ियाली आंसू!’ कोसमी विवाद में पूर्व IFS आजाद सिंह डबास का तीखा हमला— नेताओं पर FIR की मांग

सीहोर। सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र अंतर्गत कोसमी गांव में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर मचा सियासी घमासान अब और गरमा गया है। वन कर्मियों के बचाव में उतरे पूर्व IFS अधिकारी आज़ाद सिंह डबास ने पूरे मामले को ‘राजनीतिक ड्रामा’ करार दिया है। डबास ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनके पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान और स्थानीय विधायक पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वोट बैंक और राजनीतिक फायदे के लिए प्रशासनिक अमले पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।

पूर्व IFS अधिकारी ने तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि जिन लोगों को गरीब और बेसहारा बताकर राजनीति की जा रही है, वे असल में काफी सक्षम हैं। उन्होंने दावा किया कि अतिक्रमण करने वालों में से कई लोगों के पास पहले से पक्के मकान, गाड़ियां और अन्य संपत्तियां मौजूद हैं। इतना ही नहीं, इनमें से कई लोग स्थानीय स्तर पर राजनीतिक पहुंच और रसूख भी रखते हैं। इसके बावजूद जंगल की बेशकीमती 36 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर अवैध तरीके से कब्ज़ा जमाया गया था।

डबास ने कहा कि वन विभाग ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता और वन अधिनियम के प्रावधानों के तहत पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए वर्ष 2022 के बाद हुए अवैध कब्ज़ों को हटाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सक्षम लोग वन भूमि पर कब्ज़ा करते हैं, तब नेताओं को नियम-कानून याद क्यों नहीं आते?

उन्होंने नेताओं द्वारा वन कर्मियों के लिए इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि फील्ड में निष्पक्ष काम कर रहे कर्मचारियों का मनोबल गिराया जा रहा है। पूर्व IFS ने मांग की है कि अपनी सरकारी ड्यूटी निभा रहे वन कर्मचारियों को धमकाने, झूठी कहानियां गढ़ने और उनके काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की धाराओं में FIR दर्ज होनी चाहिए।

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