कलेक्ट्रेट से जारी फरमान के बाद बड़ा सवाल—क्या ज़मीन पर टूटेगा ठेकेदारों की मनमानी का नेटवर्क, या फिर कागजों तक ही सिमटेगा गुणवत्ता का दावा? रायसेन। “सड़कें ऐसी बनें जो सालों-साल चलें, गुणवत्ता से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” रायसेन कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में जब नवागत कलेक्टर श्री रोहित सिसोनिया ने कड़े लहजे में निर्माण और विकास कार्यों की समीक्षा की, तो यह बात प्रशासनिक गलियारों में गूंज गई। बैठक में दो-टूक कहा गया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। कलेक्टर की यह मंशा आम जनता के हित में बेहद सराहनीय है, लेकिन अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यह उठ रहा है कि पीडब्ल्यूडी (PWD), ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के जिम्मेदार अफसर कलेक्टर की इन बातों पर ज़मीन पर कितना अमल करते हैं? आदेश सख्त, लेकिन ज़मीनी हकीकत हमेशा उलटी रायसेन जिले में चिकलोद-रायसेन मार्ग हो या टेकापार-गैरतगंज सड़क, निर्माण कार्यों में तकनीकी मापदंडों की अनदेखी और डामर की घटिया क्वालिटी की शिकायतें कोई नई बात नहीं हैं। पहली ही बारिश में गिट्टियां उखड़ना और डामर का बह जाना यहां की सड़कों का दस्तूर बन चुका है। ऐसे में कलेक्टर की यह चेतावनी अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए स्पष्ट संकेत है कि अब पुराना ढर्रा नहीं चलेगा। इन 4 मोर्चों पर होगी विभाग की असली परीक्षा: 1. औचक निरीक्षण और लैब जांच: क्या विभागीय इंजीनियर सिर्फ ठेकेदारों के बिल पास करने के लिए कागजी रिपोर्ट बनाएंगे या फिर मौके पर जाकर बिटुमिन के ग्रेड, गिट्टी की मोटाई और रोलिंग की निष्पक्ष जांच कराएंगे? 2. गारंटी पीरियड (DLP) का बोर्ड: क्या निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगाकर यह साफ लिखा जाएगा कि सड़क की गारंटी कितने साल की है और खराबी आने पर किस अफसर का नंबर मिलाना है? 3. लापरवाहों पर सीधी कार्रवाई: क्या सिर्फ नोटिस देकर खानापूर्ति होगी या घटिया काम मिलने पर ठेकेदार की धरोहर राशि राजसात और ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई देखने को मिलेगी? 4. जल निकासी पर ध्यान: पानी के भराव से ही सड़कें सबसे पहले बर्बाद होती हैं। क्या सड़क के साथ-साथ मजबूत नाली निर्माण पर तकनीकी अमला ध्यान देगा? जनता की आस, कागजों से बाहर आए आदेश कलेक्टर श्री सिसोनिया ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्य केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों को सुगम और सुरक्षित आवागमन देने के लिए होने चाहिए। अब गेंद संबंधित विभागों के पाले में है। यदि विभाग ने ईमानदारी से इन निर्देशों का 50 फीसदी भी ज़मीन पर उतार दिया, तो निश्चित तौर पर जिले की जनता को गड्ढों और धूल से बड़ी राहत मिलेगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग कलेक्टर के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर निर्माण एजेंसियों की पुरानी चाल बदस्तूर जारी रहती है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation शिवराज बनाम मोहन: बुधनी की लाल माटी पर छिड़ा वर्चस्व का खुला दंगल SEIAA में बड़ा प्रशासनिक टकराव, अध्यक्ष ने वरिष्ठ IAS अफसरों पर लगाए गंभीर आरोप; CBI जांच और निलंबन की मांग