भोपाल। गणेशोत्सव बीतते ही आने वाले नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े पर्वों से पहले मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की रसोई पर महंगाई का भारी बोझ पड़ने लगा है। अभी लोग शक्कर के बढ़े दामों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि किराना बाजार में दालों की कीमतों ने जोरदार छलांग लगा दी है। मंडियों में आवक घटने और खपत बढ़ने के चलते रोजमर्रा की थाली से दाल दूर होती नजर आ रही है। सबसे ज्यादा मार रोज खाई जाने वाली तुवर दाल पर पड़ी है, जिसके भाव सितंबर महीने के भीतर ही ₹19 प्रति किलो तक चढ़ चुके हैं।

थाली से गायब हो रहा पोषण: जानिए किस दाल में कितनी लगी आग

राजधानी के थोक व खुदरा किराना बाजारों में हर किस्म की दाल पर ₹3 से लेकर ₹10 प्रति किलो तक की तेजी देखी जा रही है।

 तुवर (अरहर) दाल: 1 सितंबर को जो तुवर ₹111 प्रति किलो मिल रही थी, वह बीते महज 7 दिनों के अंदर ₹119 से छलांग लगाकर ₹130 प्रति किलो पर पहुंच गई है।

 चना दाल: आम घरों और हलवाइयों की पहली पसंद चना दाल ₹76 से बढ़कर ₹80 प्रति किलो हो चुकी है। थोक मंडी में यह ₹400 प्रति क्विंटल तक महंगी हुई है।

 हरी मूंग व मूंग मोगर: हरी मूंग ₹85 से उछलकर ₹89 और मूंग मोगर ₹91 से चढ़कर ₹93 प्रति किलो बिक रही है।

 उड़द मोगर: इसके दाम ₹102 से बढ़कर ₹105 प्रति किलो पर टिक गए हैं।

 मसूर दाल: सबसे किफायती मानी जाने वाली मसूर दाल भी ₹73 से बढ़कर सीधे ₹76 प्रति किलो हो गई है।

क्यों अचानक भड़की दालों की कीमतें?

1. त्योहारी और वैवाहिक सीजन की अग्रिम मांग: आगे आने वाले बड़े त्योहारों और उसके तुरंत बाद शुरू होने वाले वैवाहिक सीजन के चलते बाजार में दालों की भारी खपत का अनुमान है। मिलर्स और व्यापारी अभी से बड़ा स्टॉक जुटाने में लगे हैं।

2. पुरानी फसल खत्म, नई में देरी: प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों से मंडियों में पुराना माल लगभग खत्म हो चुका है। खेतों से नई फसल के आने में अभी समय है, जिससे बाजार में आपूर्ति की भारी कमी पैदा हो गई है।

3. आयात और ढुलाई का खर्च: म्यांमार और कनाडा जैसे देशों से आने वाले दलहन की वैश्विक दरों और ऊंची ट्रांसपोर्टेशन लागत ने भी खुदरा बाजार में आग लगाने का काम किया है।

सरकारी दखल की दरकार: क्या शक्कर की तरह दालों में भी मिलेगा दखल का फायदा?

हाल ही में जब शक्कर ₹70 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, तब केंद्र व राज्य सरकार के सक्रिय दखल और बाजार में अतिरिक्त कोटा जारी होने के बाद इसके दाम घटकर ₹52 प्रति किलो पर आ गए थे।

किराना कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं का मानना है कि यदि सरकार ने तुरंत अपने बफर स्टॉक से दालों को खुले बाजार में नहीं उतारा, तो आने वाले त्योहारी दिनों में तुवर सहित अन्य दालों के दाम जनता की पहुंच से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे। अब सबकी निगाहें सरकारी नियंत्रण और मंडियों में नई फसल की दस्तक पर टिकी हैं।

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