मुजफ्फराबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात बेकाबू हो चुके हैं। बुनियादी हकों और राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे स्थानीय लोगों और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़पें तेज हो गई हैं। पूरे PoK में शटर-डाउन हड़ताल, चक्का जाम और मोबाइल-इंटरनेट बैन के कारण हाहाकार मचा हुआ है। पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए कड़े कानून और भारी पुलिस बल का सहारा लिया है, जिससे स्थानीय जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

आखिर PoK में अचानक यह तनाव क्यों शुरू हुआ और इसके पीछे की असली वजहें क्या हैं।

क्यों सुलग रहा है PoK? तनाव की 3 मुख्य वजहें

PoK में चल रहे इस बड़े आंदोलन की अगुवाई Jammu Kashmir Joint Awami Action Committee (JAAC) कर रही है। इस बार तनाव बढ़ने के पीछे 3 बड़े कारण हैं:

1. JAAC संगठन पर बैन और नेताओं पर इनाम

पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए ‘Joint Awami Action Committee’ (JAAC) को एंटी-टेररिज्म कानून के तहत बैन (गैरकानूनी) घोषित कर दिया है। इतना ही नहीं, सरकार ने आंदोलन के प्रमुख नेताओं (जैसे शौकत नवाज मीर और उमर नजीर कश्मीरी) की गिरफ्तारी पर करीब 1 करोड़ रुपये का इनाम रख दिया है। इस तानाशाही फैसले से लोग भड़क उठे हैं।

2. 12 विधायी सीटों (Legislative Seats) का बड़ा विवाद

PoK की विधानसभा में 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो पाकिस्तान के अन्य शहरों (जैसे पंजाब या कराची) में रहते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान की मुख्य राजनीतिक पार्टियां इन 12 सीटों का गलत इस्तेमाल करती हैं। वे इन सीटों के जरिए PoK में अपनी मर्जी की ‘कठपुतली सरकार’ चुनती हैं, जिससे स्थानीय लोगों के मत का कोई महत्व नहीं रह जाता। JAAC की मांग है कि इस कोटे को तुरंत खत्म किया जाए।

3. महंगाई और आर्थिक बदहाली

PoK की जनता लंबे समय से आटे पर सब्सिडी, बिजली के बिलों में कटौती और बुनियादी नागरिक अधिकारों की मांग कर रही है। पाकिस्तान के गंभीर आर्थिक संकट का सबसे बड़ा बोझ PoK की जनता पर डाला जा रहा है, जिससे वहां नाराजगी चरम पर है।

कब और कैसे बिगड़े हालात?

 5 जून से शुरुआत: JAAC ने अपनी मांगों को लेकर एक शांतिपूर्ण मार्च और बड़ी हड़ताल का ऐलान किया था। लेकिन पाकिस्तान सरकार ने बातचीत का रास्ता चुनने के बजाय 5 जून को संगठन पर पूरी तरह बैन लगा दिया और इंटरनेट सेवाएं ठप कर दीं।

 पुलिस की बर्बरता और हिंसा: इसके बाद मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर जैसे प्रमुख शहरों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस की इस हिंसक कार्रवाई में कई आम नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिससे आंदोलन और ज्यादा उग्र हो गया है।

भारत ने पाकिस्तान को घेरा: मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन

PoK के बिगड़ते हालातों पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे PoK में निर्दोष नागरिकों पर हो रहे अत्याचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए पाकिस्तान सरकार को जवाबदेह ठहराएं। भारत ने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान अपनी अंदरूनी नाकामियों को छिपाने के लिए हमेशा की तरह झूठा प्रोपेगैंडा और भारत विरोधी फर्जी खबरें फैलाने की कोशिश कर रहा है।

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