भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन फॉर्म रिटर्निंग ऑफिसर ने रद्द (Reject) कर दिया है।

इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस की महीनों की तैयारी और ‘होटल पॉलिटिक्स’ धरी की धरी रह गई, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे बीजेपी की सोची-समझी चाल और ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है।

क्यों रद्द हुआ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन?

मामला चुनावी हलफनामे (Affidavit) में जानकारी छिपाने से जुड़ा है। बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट और बीजेपी प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।

 आरोप: बीजेपी का दावा था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित (Pending) एक मामले की जानकारी छिपाई है।

 रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला: इस आपत्ति पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन से जवाब मांगा था। जवाब संतोषजनक न होने पर, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया गया।

धरती धरी रह गई कांग्रेस की तैयारी, रिसॉर्ट में ही रह गए विधायक!

इस चुनाव को लेकर कांग्रेस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। क्रॉस वोटिंग और विधायकों की खरीद-फरोख्त (Horse Trading) से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को पहले ही एक सुरक्षित होटल/रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया था। कांग्रेस को उम्मीद थी कि वे एकजुट रहकर बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे।

लेकिन वोटिंग की नौबत आने से पहले ही खेल खत्म हो गया। इसे राजनीति का ‘टेक्निकल नॉकआउट’ कहा जा रहा है, जहां बिना एक भी वोट पड़े ही कांग्रेस रेस से बाहर हो गई और उसकी पूरी फील्डिंग बेकार चली गई।

कांग्रेस का पलटवार: “यह बीजेपी की गंदी चाल और लोकतंत्र की हत्या”

नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता विवेक तंखा और हरीश चौधरी ने मोर्चा संभाल लिया है। कांग्रेस का कहना है कि:

1 मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं है। उन्हें सिर्फ तेलंगाना की एक अदालत से 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की कार्रवाई का ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show-Cause Notice) मिला था।

2 चुनाव नियमों के मुताबिक, हलफनामे में केस या FIR की जानकारी दी जाती है, सिर्फ नोटिस की नहीं।

3 कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी हार के डर से बौखला गई थी, इसलिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके यह साजिश रची गई है। कांग्रेस अब इस फैसले के खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।

बीजेपी ने कहा- “नियम सबके लिए बराबर, कांग्रेस अपनी गलती छुपा रही”

दूसरी तरफ, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनाव में पारदर्शिता सबसे जरूरी है। अगर कांग्रेस उम्मीदवार ने जानबूझकर जानकारी छिपाई, तो कानूनन उनका फॉर्म रिजेक्ट होना ही था। इसमें किसी की कोई चाल नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से एक कानूनी प्रक्रिया है।

मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को वोटिंग होनी है। बीजेपी की तरफ से तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट मैदान में हैं। अगर कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध (Unopposed) चुना जाना तय है।

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