भोपाल:

मध्य प्रदेश में लाखों यात्रियों को जल्द ही सफर में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। राज्य सरकार की ‘नई परिवहन नीति’ के विरोध में प्रदेश भर के प्राइवेट बस संचालकों ने 2 मार्च 2026 से चक्का जाम (अनिश्चितकालीन हड़ताल) करने का ऐलान कर दिया है। सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच इस टकराव की मुख्य वजह ‘मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा’ नाम की नई योजना है।

क्या है सरकार की नई परिवहन नीति?

राज्य सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत बसों के संचालन का नया सिस्टम लागू कर रही है। सरकार का तर्क है कि इससे ग्रामीण इलाकों में बेहतर बस सेवा मिलेगी और मनमाने किराए पर रोक लगेगी:

• प्रदेश में बस संचालन का जिम्मा 7 बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को दिया जाएगा।

• कंपनियों को फायदे वाले रूट के साथ-साथ कम मुनाफे वाले ग्रामीण रूटों पर भी बसें चलानी अनिवार्य होंगी।

• सुरक्षा के लिए बसों में जीपीएस (GPS) और आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाएगा।

• सरकार किराए को सीधे तौर पर नियंत्रित करेगी ताकि आम जनता को सस्ती और सुरक्षित यात्रा मिल सके।

बस ऑपरेटर क्यों कर रहे हैं विरोध?

प्राइवेट बस मालिकों का मानना है कि यह नई नीति छोटे ऑपरेटरों को खत्म कर देगी। उनके विरोध के मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

• लीज़ शुल्क का बोझ: छोटे ऑपरेटरों को अब इन 7 बड़ी कंपनियों के अधीन बसें चलानी होंगी और प्रति किलोमीटर लगभग ₹3 का लीज शुल्क देना होगा, जिससे नुकसान होगा।

• टैक्स में बढ़ोतरी: बसों पर लगने वाले टैक्स को 12% से बढ़ाकर 18% कर दिया गया है।

• अस्तित्व पर संकट: ऑपरेटरों को डर है कि इस नई व्यवस्था से उनके पुराने परमिट रद्द हो जाएंगे और कई लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

आम जनता पर असर

बस यूनियन की मांग है कि हाल ही में लाए गए इन संशोधनों को तुरंत वापस लिया जाए और पुरानी व्यवस्था लागू रहे। अगर सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच जल्द ही कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता है, तो 2 मार्च से प्रदेश में बसों के पहिए थम सकते हैं। इसका सीधा असर रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और आम यात्रियों पर पड़ेगा।

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