ईरान और इजरायल के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर (ceasefire) की खबर से पूरी दुनिया को लगा था कि अब मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध रुक जाएगा। लेकिन यह शांति ज्यादा देर नहीं टिक पाई। सीजफायर लागू होने के बावजूद इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर दिया है।

हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब सीजफायर हो गया है, तो इजरायल लेबनान पर बम क्यों बरसा रहा है? आइए इस पूरी उलझन और इसके पीछे की असली वजह को आसान शब्दों में समझते हैं।

सीजफायर पर क्या है असली कन्फ्यूजन?

इस पूरी घटना के पीछे की सबसे बड़ी वजह सीजफायर की शर्तों को लेकर हुआ मतभेद है। दोनों पक्ष इस समझौते को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं:

इजरायल और अमेरिका का पक्ष: अमेरिका और इजरायल का कहना है कि यह समझौता सिर्फ ईरान और इजरायल के बीच सीधे युद्ध को रोकने के लिए हुआ है। व्हाइट हाउस (White House) ने साफ तौर पर कहा है कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा बिल्कुल नहीं है।

ईरान का पक्ष: दूसरी तरफ, ईरान का कहना है कि उसने जो 10 शर्तों वाला समझौता किया था, वह सभी मोर्चों पर शांति के लिए था। ईरान के मुताबिक लेबनान भी इस समझौते का अहम हिस्सा है।

लेबनान पर 10 मिनट में 100 एयरस्ट्राइक

चूंकि इजरायल लेबनान को इस शांति समझौते से बाहर मानता है, इसलिए उसने 8 अप्रैल 2026 को लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण हमला किया। इजरायल ने सिर्फ 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा एयरस्ट्राइक (airstrike) कीं।

इजरायल का सीधा लक्ष्य लेबनान में मौजूद हिजबुल्लाह (Hezbollah) के कमांड सेंटर, हथियारों के गोदाम और उनके ठिकानों को पूरी तरह खत्म करना है। इजरायल इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहा है।

ईरान का पलटवार और दुनिया के व्यापार पर असर

इजरायल के इस महाहमले के बाद ईरान भी शांत नहीं बैठा है। ईरान ने इसे सीधे तौर पर सीजफायर का उल्लंघन (violation) माना है। इसके विरोध में ईरान ने एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही को रोक दिया है।

आपको बता दें कि यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत अहम है। अगर यहां से व्यापार रुकता है, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

क्या फिर भड़केगा युद्ध?

मौजूदा हालात को देखकर यह साफ है कि अमेरिका की मौजूदगी में हुआ यह सीजफायर बहुत ही कमजोर बुनियाद पर टिका है। अगर इजरायल ने लेबनान पर अपने हमले नहीं रोके और ईरान ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी, तो मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो जाएगी और एक बार फिर भयंकर युद्ध शुरू हो सकता है।

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