मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को जल्द लागू करने के लिए लोकसभा और विधानसभाओं की सीटें 50% बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जानिए क्या है पूरी योजना।

नई दिल्ली:

केंद्र की मोदी सरकार ने महिला सशक्तिकरण और देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मोदी कैबिनेट ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) को जल्द से जल्द लागू करने के लिए एक बेहद अहम प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं की सीटों में 50% की बढ़ोतरी की जाएगी।

लोकसभा में अब होंगी 816 सीटें

अभी हमारी लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं। नए फैसले के अनुसार, परिसीमन (Delimitation) के बाद इन सीटों की संख्या में 50% का इजाफा किया जाएगा। बढ़ोतरी के बाद लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 816 हो जाएंगी।

महिलाओं के लिए 273 सीटें होंगी आरक्षित

सीटें बढ़ाने का सबसे बड़ा फायदा महिलाओं को मिलेगा। नई 816 सीटों में से एक-तिहाई यानी 273 सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित (Reserve) रहेंगी। सरकार ने सीटें बढ़ाने का फैसला इसलिए लिया है ताकि महिलाओं को 33% आरक्षण भी मिल जाए और वर्तमान में जो सांसद हैं, उनकी सीट भी खतरे में न पड़े।

2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन

पहले नियम था कि महिला आरक्षण नई जनगणना (जो 2026 के बाद होनी थी) के आधार पर लागू किया जाएगा। लेकिन इसमें बहुत लंबा समय लगता। इसलिए सरकार ने प्रक्रिया को तेज करने के लिए पुरानी 2011 की जनगणना के आधार पर ही सीटों का बंटवारा (परिसीमन) करने का फैसला लिया है।

2029 के लोकसभा चुनाव पर है नजर

सरकार का मुख्य लक्ष्य यह है कि 2029 के लोकसभा चुनावों तक इस महिला आरक्षण कानून को देश में पूरी तरह से लागू कर दिया जाए। इससे अगले आम चुनाव में बड़ी संख्या में महिलाएं संसद पहुंच सकेंगी।

दक्षिण भारत के राज्यों की चिंता की गई दूर

दक्षिण भारत के राज्यों को अक्सर यह डर रहता है कि आबादी के हिसाब से सीटें बढ़ने पर उत्तर भारत (जैसे यूपी, बिहार) की सीटें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी। इसे दूर करने के लिए सरकार ने यह साफ कर दिया है कि राज्यों की सीटों का जो वर्तमान अनुपात (Proportion) है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

इस बिल को पास कराने और कानून का रूप देने के लिए सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया है। वहां पास होने के बाद यह ऐतिहासिक फैसला पूरे देश में लागू हो जाएगा।

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