भोपाल/मध्य प्रदेश: राजधानी भोपाल के रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे कैफे, रेस्टोरेंट और दुकानों पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद हड़कंप मचा हुआ है। 10 नंबर मार्केट से लेकर अरेरा कॉलोनी तक सीलिंग की तलवार लटक रही है। 15 September 2026 की अगली सुनवाई से पहले शासन और नगर निगम के पास केवल 5 हफ्तों का समय बचा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लाखों लोगों के रोजगार और अरबों के कारोबार को उजड़ने से बचाने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट में क्या ठोस फॉर्मूला पेश कर सकती है?

सुप्रीम कोर्ट में सरकार के 4 बड़े संभावित दांव:

1. दिल्ली की तर्ज पर ‘मिक्स्ड लैंड यूज़’ का हलफनामा

 सरकार सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली मास्टर प्लान का हवाला देकर ‘मिक्स्ड लैंड यूज़’ (Mixed Land Use) पॉलिसी का ड्राफ्ट रख सकती है।

 इसके तहत कोर्ट से राहत मांगी जाएगी कि 18 मीटर से 24 मीटर से अधिक चौड़ी मुख्य सड़कों पर गैर-प्रदूषणकारी कारोबारों को चलने की अनुमति दी जाए, ताकि शांत रिहायशी कॉलोनियों की मूल बसाहट भी न बिगड़े और मुख्य मार्गों का व्यापार भी सुरक्षित रहे।

2. नया मास्टर प्लान और 6 महीने की अंतरिम राहत की मांग

 भोपाल का मास्टर प्लान पिछले दो दशकों से अटका हुआ है। सरकार कोर्ट में शपथ पत्र देकर नए मास्टर प्लान 2031/2047 की अधिसूचना की अंतिम समय-सीमा पेश कर सकती है।

 कोर्ट से अपील की जा सकती है कि जब तक मास्टर प्लान पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक मुख्य सड़कों पर सीलिंग की कार्रवाई पर अंतरिम रोक (Stay) लगाई जाए।

3. ‘इम्पैक्ट फीस’ और कम्पाउंडिंग से नियमितीकरण का प्लान

 प्रशासन कोर्ट को यह प्रस्ताव दे सकता है कि नियमों के दायरे में आने वाली दुकानों और कैफे से एकमुश्त ‘कन्वर्जन चार्ज’ या ‘इम्पैक्ट फीस’ लेकर उन्हें नियमित (Regularize) किया जाए।

 इस टैक्स से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल उन इलाकों में मल्टी-लेवल पार्किंग और ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने में करने का वादा किया जा सकता है।

4. सख्त श्रेणी विभाजन (Activity Zoning) का फॉर्मूला

 सरकार गतिविधियों के आधार पर छूट का प्लान रख सकती है। डॉक्टर्स क्लीनिक, कंसल्टेंसी ऑफिस, बुटीक और छोटे किराना स्टोर को तुरंत राहत, जबकि बड़े कैफे और लाउंज के लिए सख्त पार्किंग व फायर एनओसी की शर्त तय की जा सकती है।

कोर्ट ने नगर निगम की पुरानी रिपोर्ट को खारिज करते हुए नए और निष्पक्ष सर्वे का आदेश दिया है। अगर सरकार 15 September को बिना ठोस ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान के कोर्ट पहुंची, तो सीलिंग की बड़ी कार्रवाई तय है। ऐसे में कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मिक्स्ड लैंड यूज़’ और ‘पार्किंग मैनेजमेंट’ का पुख्ता ब्लूप्रिंट ही कारोबारियों की आखिरी उम्मीद बन सकता है।

error: Content is protected !!