नई दिल्ली/ ढाका:

दुनिया भर में चल रहे ऊर्जा संकट के बीच भारत ने मंगलवार, 10 मार्च 2026 को ‘भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन’ के जरिए 5,000 टन डीजल बांग्लादेश भेजना शुरू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है और बांग्लादेश भारी ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है।

इस खबर की मुख्य बातें:

• कहां से जा रहा है डीजल?: यह डीजल असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी (Numaligarh Refinery) से भेजा जा रहा है। यह 131 किलोमीटर लंबी क्रॉस-बॉर्डर पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के पार्वतीपुर डिपो (Parbatipur Depot) तक पहुंचेगा।

• सप्लाई की स्पीड: इस पाइपलाइन से हर घंटे लगभग 113 टन तेल भेजा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पूरी 5,000 टन की खेप को पहुंचने में लगभग 44 से 45 घंटे का समय लगेगा।

• पुराने समझौते का हिस्सा: बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के चेयरमैन मुहम्मद रेजानुर रहमान ने साफ किया कि यह सप्लाई दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद एक एग्रीमेंट का हिस्सा है। इस एग्रीमेंट के तहत भारत को हर साल 180,000 टन डीजल पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को देना है। अगले 6 महीनों के भीतर 90,000 टन डीजल आयात करने का लक्ष्य रखा गया है।

बांग्लादेश में ईंधन का संकट क्यों है?

बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 95% हिस्सा बाहर से आयात (import) करता है। पश्चिम एशिया में तनाव (ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच) के कारण तेल की सप्लाई में काफी अड़चनें आई हैं:

1. सरकार के कड़े कदम: तेल की कमी के कारण बांग्लादेश सरकार को कुछ समय के लिए प्राइवेट और सरकारी यूनिवर्सिटी बंद करनी पड़ी हैं। साथ ही, पेट्रोल पंपों पर वाहनों के हिसाब से तेल भराने की लिमिट (rationing) भी तय कर दी गई है।

2. जमाखोरी (Hoarding) पर लगाम: इस संकट का फायदा उठाकर वहां के कुछ व्यापारी गैर-कानूनी तरीके से तेल को छिपाकर रख रहे थे ताकि बाद में महंगे दाम पर बेच सकें। सरकार ने ऐसे लोगों पर लगाम कसने के लिए मोबाइल कोर्ट और पेट्रोल पंपों पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी है।

भारत का रुख:

भारत सरकार के सूत्रों ने बताया कि यह एक नियमित कमर्शियल सप्लाई है। हालांकि, भारत सरकार इस बात की भी बारीकी से निगरानी कर रही है कि इस निर्यात (export) के कारण भारत के अंदर घरेलू ईंधन की कोई कमी न हो।

2023 में इस पाइपलाइन के शुरू होने से पहले, भारत से बांग्लादेश तक तेल रेलवे वैगन (ट्रेनों) के जरिए जाता था। पाइपलाइन से तेल भेजने से समय की भारी बचत होती है और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी काफी कम हो गया है।

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