नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन का एक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर हर किसी का खून खौला रहा है। 23 मार्च की रात महिला कोच में 4 नाबालिग लड़कियों ने जिस तरह सरेआम गंदी गालियां दीं और हंगामा किया, उसने समाज के सामने एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। सोचने वाली बात यह है कि आखिर 50 महिलाओं से भरे एक पूरे कोच में 4 लड़कियों की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वो बिना किसी डर के इतनी बकवास कर गईं?

तमाशा देखती रही भीड़, चुप रहा पूरा कोच

वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि जब एक महिला यात्री के कपड़ों पर भद्दे कमेंट्स किए जा रहे थे, तब वहां मौजूद ज़्यादातर महिलाएं चुपचाप अपनी सीट पर बैठी तमाशा देख रही थीं। पूरे कोच में से केवल श्रुति नाम की एक यात्री और वीडियो बना रही लड़की ने ही उन्हें रोकने की हिम्मत दिखाई।

हद तो तब हो गई जब उन 4 बदतमीज लड़कियों ने ‘निर्भया’ जैसे बेहद दर्दनाक और संवेदनशील मामले का भी मज़ाक उड़ाया। इसके बावजूद, कोच में मौजूद भीड़ शांत रही।

आखिर 4 लड़कियां 50 महिलाओं पर कैसे भारी पड़ गईं?

यह घटना हमारी सोसाइटी की एक कड़वी सच्चाई दिखाती है। अगर उस कोच में बैठी 50 महिलाएं एक साथ मिलकर आवाज उठातीं, तो क्या उन 4 लड़कियों की एक भी शब्द बोलने की हिम्मत होती? बिलकुल नहीं। जब हम गलत का विरोध नहीं करते, तो हम जाने-अनजाने में ऐसे लोगों के हौसले और बढ़ा देते हैं। उन लड़कियों को पता था कि कोई कुछ नहीं बोलेगा, और इसी बात ने उन्हें इतनी गालियां देने की हिम्मत दी।

पुलिस से पहले खुद लेनी होगी जिम्मेदारी

हम हमेशा महिला सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस, प्रशासन और DMRC को ज़िम्मेदार मानते हैं। यह सही भी है कि प्रशासन को सख्त होना चाहिए। लेकिन मौके पर, हमें अपनी और दूसरी महिलाओं की हिफाजत के लिए खुद भी खड़ा होना पड़ेगा।

इस रिपोर्ट के जरिए हमारा बस यही संदेश है कि महिलाओं को अपनी लड़ाई खुद लड़ना और गलत के खिलाफ तुरंत आवाज़ उठाना सीखना होगा। जब तक महिलाएं एकजुट होकर गलत का तुरंत विरोध नहीं करेंगी, तब तक ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। भीड़ का हिस्सा बनकर मोबाइल में सिर झुकाए रखने से समाज नहीं बदलेगा, बदलाव के लिए आवाज उठानी होगी।

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