मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को रायसेन में आयोजित कृषि मेले में जाने से प्रशासन ने रोक दिया। इस घटना के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया है।

भोपाल/रायसेन:

मध्य प्रदेश की राजनीति में 13 अप्रैल 2026 को एक नया विवाद खड़ा हो गया। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी को पुलिस ने रायसेन जाने से बीच रास्ते में ही रोक दिया। रायसेन में आज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भव्य कृषि मेले का समापन समारोह था। इस घटना के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है और इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी रायसेन में आयोजित हो रहे कृषि मेले में शामिल होने के लिए रवाना हुए थे। लेकिन पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रायसेन पहुंचने से पहले ही आनंद नगर के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया। इस दौरान जीतू पटवारी और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के बीच काफी तीखी बहस भी देखने को मिली।

बीच रास्ते में रोके जाने पर जीतू पटवारी ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि वह कोई विरोध प्रदर्शन या हंगामा करने नहीं जा रहे थे। पटवारी ने कहा, “मैं एक किसान के रूप में मेले में हो रहे कृषि के नए प्रयोग और नवाचार देखने जा रहा था।” उन्होंने अधिकारियों से बार-बार पूछा कि उन्हें आखिर किस कानून के तहत रोका जा रहा है। काफी देर बहस होने के बाद भी जब उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं मिली, तो उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा।

विपक्ष ने लगाया ‘लोकतंत्र की हत्या’ का आरोप

इस घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे नकारात्मक राजनीति बताया है। विपक्ष का आरोप है कि एक स्वतंत्र नागरिक और एक बड़े राजनीतिक दल के नेता को इस तरह से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार विपक्ष से डरी हुई है और अपनी कमियां छिपाने के लिए पुलिस और प्रशासन का गलत इस्तेमाल कर रही है।

प्रशासन का क्या है तर्क?

दूसरी तरफ, पुलिस और प्रशासन का मुख्य ध्यान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर था। रायसेन में केंद्रीय मंत्री सहित कई VVIP मौजूद थे। ऐसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा के कड़े नियम होते हैं। माना जा रहा है कि प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया ताकि किसी भी तरह के राजनीतिक टकराव या हंगामे की स्थिति न बने और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

इस घटना ने यह बहस फिर से छेड़ दी है कि क्या सुरक्षा के नाम पर किसी नेता को ऐसे रोकना सही है? फिलहाल इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में और गरमा सकता है।

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