पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग (Election Commission) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच टकराव बढ़ गया है। दोनों के बीच हुई मीटिंग बिना किसी नतीजे के सिर्फ कुछ मिनटों में ही खत्म हो गई।

नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। 8 April 2026 को चुनाव आयोग (EC) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच हुई एक अहम मीटिंग भारी हंगामे की वजह बन गई। यह मीटिंग 10 मिनट से भी कम समय में खत्म हो गई और इसके बाद दोनों ही तरफ से गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

TMC का आरोप: “हमें Get lost कहा गया”

TMC के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन (Derek O’Brien) के नेतृत्व में एक डेलिगेशन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मिलने गया था। TMC का दावा है कि यह मीटिंग सिर्फ 5 मिनट चली। पार्टी का आरोप है कि जब वे चुनाव में निष्पक्षता और अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर अपनी बात रख रहे थे, तो CEC ने कथित तौर पर उन्हें “Get lost” (यहाँ से चले जाओ) कह दिया। TMC ने चुनाव आयोग को चुनौती दी है कि अगर वे सही हैं, तो मीटिंग का वीडियो जनता के सामने रखें।

चुनाव आयोग का पक्ष: “TMC नेताओं ने चिल्लाकर बात की”

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि मीटिंग में TMC नेताओं का बर्ताव बहुत आक्रामक था। आयोग के मुताबिक, जब डेरेक ओ’ब्रायन अपनी बात पूरी कर चुके और CEC ने जवाब देना शुरू किया, तो TMC सांसद ने उन्हें बीच में ही टोक दिया। कहा जा रहा है कि डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि “कमीशन को सिर्फ हमारी बात सुननी चाहिए” और फिर गुस्से में मीटिंग छोड़कर चले गए।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी जंग

इस विवाद के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी दोनों भिड़ गए:

• चुनाव आयोग ने दो-टूक बात कहते हुए पोस्ट किया कि पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनाव पूरी तरह से डर-मुक्त, हिंसा-मुक्त और बूथ जैमिंग के बिना करवाए जाएंगे।

• TMC ने तुरंत पलटवार करते हुए लिखा कि चुनाव दिल्ली के कंट्रोल, राजनीतिक पक्षपात और दोहरे मापदंडों से पूरी तरह मुक्त होने चाहिए।

इस पूरे विवाद के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में और भी गर्मी आ गई है। चुनाव आयोग और TMC के बीच यह खींचतान आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ लेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

error: Content is protected !!