अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि युद्ध में ईरान की सेना तबाह हो गई है। वहीं 15 घंटे चली शांति वार्ता के फेल होने के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी शुरू कर दी है।

नई दिल्ली/वाशिंगटन:

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में हर दिन नए और चौंकाने वाले मोड़ आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान की सेना को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के चीफ एडमिरल ब्रैड कूपर ने भी इसे ईरान की “बड़ी सैन्य हार” बताया है। लेकिन क्या सच में ईरान की सेना 100% खत्म हो गई है? आइए जानते हैं युद्ध की आज (13 अप्रैल) की सबसे बड़ी अपडेट।

ईरान की सेना खत्म होने के दावे की सच्चाई

भले ही ईरान की सेना पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, लेकिन 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध में उसे अब तक का सबसे बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। उसकी सैन्य ताकत अब काफी कमजोर पड़ चुकी है:

• हथियार तबाह: ईरान के 190 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और 155 से ज्यादा नौसैनिक जहाज पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं।

• सैनिकों की मौत: युद्ध में अब तक 6000 से ज्यादा ईरानी सैनिकों की जान जा चुकी है और करीब 15000 जवान घायल हुए हैं।

• आर्थिक तबाही: सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को मिलाकर ईरान को अब तक 145 बिलियन डॉलर से ज्यादा का भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है।

इस्लामाबाद में 15 घंटे चली शांति वार्ता फेल

युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका (उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टीम) और ईरान के बीच बातचीत रखी गई थी। यह शांति वार्ता लगातार 15 घंटे तक चली, लेकिन दोनों देशों के बीच किसी भी बात पर सहमति नहीं बन पाई और यह बैठक बेनतीजा खत्म हो गई।

अमेरिका का बड़ा एक्शन: शुरू की समुद्री नाकेबंदी

बातचीत फेल होने के तुरंत बाद अमेरिका ने आज से बड़ा एक्शन लेना शुरू कर दिया है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (समुद्री रास्ता) पर नाकेबंदी कर दी है। अब यहां से गुजरने वाले व्यापारिक और सैन्य जहाजों को रोका जा रहा है, जिससे ईरान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 100 डॉलर के पार

युद्ध के फिर से तेज होने और समुद्री रास्ते के ब्लॉक होने का सीधा असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ा है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अचानक उछल गई हैं और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, शांति वार्ता फेल होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप अब ईरान पर दोबारा ‘सीमित सैन्य हमले’ (Limited Strikes) करने की तैयारी कर रहे हैं। 8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच जो 2 हफ्ते का सीजफायर लागू हुआ था, वह अब टूटता हुआ नजर आ रहा है। लेबनान में भी इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हमले लगातार जारी हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

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