यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने हाल ही में एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। जेलेंस्की के मुताबिक, रूस अपने सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करके खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की तस्वीरें ले रहा है और उन्हें ईरान को सौंप रहा है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो अब उठ रहा है वह यह है: आखिर रूस ऐसा क्यों कर रहा है?

क्या रूस अब अमेरिका को सीधे युद्ध के लिए उकसा रहा है?

1. क्या रूस चाहता है ‘सीधी टक्कर’?

अब तक अमेरिका, यूक्रेन को हथियार देकर रूस के खिलाफ ‘प्रॉक्सी वॉर’ (पीछे से युद्ध) लड़ रहा है। रूस को यह बात बहुत चुभ रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब रूस अमेरिका के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। ईरान के जरिए अमेरिकी ठिकानों पर हमले करवाकर रूस शायद यह संदेश देना चाहता है कि अगर अमेरिका उनके पड़ोस में दखल देगा, तो रूस भी दुनिया भर में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को असुरक्षित कर सकता है। ऐसा लग रहा है मानो रूस अमेरिका को चुनौती दे रहा हो कि “अब पर्दे के पीछे से नहीं, सीधे मैदान में आकर लड़ो।”

2. अमेरिका का ध्यान भटकाने की सबसे बड़ी चाल

रूस की रणनीति का एक और बहुत बड़ा हिस्सा अमेरिका का ध्यान भटकाना हो सकता है। अगर मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच भयंकर युद्ध छिड़ जाता है, तो अमेरिका को अपना पूरा फोकस, पैसा और हथियार यूक्रेन से हटाकर वहां लगाने पड़ेंगे। इसका सीधा फायदा रूस को मिलेगा और वह यूक्रेन युद्ध में आसानी से जीत हासिल कर सकेगा।

3. दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध का डर

अगर रूस सच में ईरान को अमेरिकी ठिकानों की 100% सटीक लोकेशन दे रहा है, तो यह अमेरिका के लिए खतरे की बहुत बड़ी घंटी है। अमेरिका इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला मान सकता है। अगर अमेरिका ने इसका जवाब आक्रामक तरीके से दिया और रूस पर कोई सीधा एक्शन लिया, तो यह दो महाशक्तियों के बीच सीधे टकराव की शुरुआत होगी।

रूस का ईरान को सैटेलाइट इमेज देना सिर्फ एक खुफिया मदद नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा कूटनीतिक खेल है। रूस अब अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब देने की कोशिश कर रहा है। देखना यह होगा कि अमेरिका इस उकसावे पर क्या कदम उठाता है।

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