पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: ‘पूरब के पेरिस’ में इस बार किसका बजेगा डंका?

भारत के दक्षिण में बसा पुडुचेरी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक अलग दुनिया है। 4 April आ चुकी है और 9 April 2026 को पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाने हैं। चुनाव के इस शोर-शराबे के बीच हमारी इस खास रिपोर्ट में आइए आसान भाषा में समझते हैं यहां की राजनीति, इतिहास और इस बार के चुनावी माहौल को।

फ्रांसीसी इतिहास और एक अनोखी संस्कृति

पुडुचेरी की हवाओं में आज भी फ्रांस की महक है। करीब 300 सालों तक यहां फ्रांस का राज रहा और 1954 में यह पूरी तरह से भारत का हिस्सा बना।

• आज भी यहां की सड़कों, इमारतों के डिज़ाईन और पुलिस की लाल टोपी वाली वर्दी में फ्रांस की झलक साफ दिखती है। इसीलिए इसे ‘पूरब का पेरिस’ (Paris of the East) भी कहा जाता है।

• धर्म की बात करें तो यहां लगभग 87% हिंदू आबादी है।

• पुडुचेरी के पास ‘ऑरोविले’ (Auroville) नाम की एक जगह है, जिसे दुनिया का ‘अंतर्राष्ट्रीय शहर’ कहा जाता है। वहां इंसान का कोई धर्म, जाति या देश नहीं पूछा जाता। दुनिया भर के लोग यहां शांति और भाईचारे के साथ एक साथ रहते हैं।

केंद्र शासित प्रदेश (UT) है, फिर चुनाव क्यों?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब पुडुचेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है, तो वहां मुख्यमंत्री के लिए चुनाव क्यों होते हैं?

• दरअसल, भारत के संविधान ने पुडुचेरी को एक विशेष दर्जा दिया है ताकि उसकी अलग सांस्कृतिक पहचान बची रहे।

• दिल्ली और जम्मू-कश्मीर की तरह ही पुडुचेरी की अपनी एक विधानसभा है।

• यहां की जनता वोट डालकर अपना विधायक और मुख्यमंत्री खुद चुनती है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और आम लोगों से जुड़े फैसले लेते हैं। हालांकि, पुलिस और बड़े प्रशासनिक फैसले सीधे उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) के जरिए केंद्र सरकार के हाथ में होते हैं।

2026 का चुनावी महासंग्राम: कौन है आमने-सामने?

पुडुचेरी में सरकार बनाने के लिए 30 में से 16 सीटों का बहुमत चाहिए होता है। इस बार मुख्य टक्कर इन दो बड़े गठबंधनों के बीच है:

1. NDA गठबंधन (AINRC और BJP): पुडुचेरी की राजनीति में एन. रंगासामी (N. Rangaswamy) सबसे बड़ा चेहरा हैं। उनकी अपनी पार्टी है— AINRC। पिछले चुनाव में रंगासामी ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। इस बार भी यह गठबंधन पूरी ताकत से सत्ता बचाने के लिए मैदान में है।

2. विपक्षी गठबंधन (Congress और DMK): एक समय था जब पुडुचेरी को कांग्रेस का पक्का गढ़ माना जाता था। इस बार कांग्रेस और तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इनका पूरा जोर खोई हुई सत्ता में वापसी करने पर है।

क्या हैं जनता के मुख्य मुद्दे?

इस बार पुडुचेरी के चुनाव में ‘पूर्ण राज्य का दर्जा’ (Full Statehood) सबसे बड़ा मुद्दा है। चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल के बीच अक्सर अधिकारों को लेकर टकराव होता है, इसलिए नेता और जनता दोनों पुडुचेरी को पूर्ण राज्य बनाने की मांग करते हैं। इसके अलावा, टूरिज्म को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए रोजगार भी अहम चुनावी मुद्दे हैं।

9 April को पुडुचेरी की जनता EVM का बटन दबाकर अपना फैसला सुनाएगी और 4 May को पता चलेगा कि सत्ता की चाबी किसे मिलेगी।

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