भोपाल दौरे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दावा; नए कानूनों से तय समय में इंसाफ की बात, अब देखना है कि यह सिर्फ घोषणा है या ठोस जमीनी प्लान। भोपाल: देश में सालों-साल अदालतों के चक्कर काटने की परेशानी किसी से छिपी नहीं है। आम नागरिक के लिए सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि उसके मुकदमे का अंतिम फैसला कब आएगा। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नए आपराधिक कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि करीब 1.5 साल में नए आपराधिक कानून पूरी तरह लागू हो जाएंगे और इसके बाद FIR से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक किसी भी केस का निपटारा 3 साल के भीतर होगा। शाह ने इसे दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली बताते हुए कहा कि ये कानून नागरिकों के सम्मान की रक्षा और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए बने हैं। जनहित के लिहाज से क्यों साबित होगा बड़ा कदम? अगर गृह मंत्री का यह दावा सही मायनों में धरातल पर उतरता है, तो यह देश की जनता के लिए आजादी के बाद का सबसे बड़ा कानूनी सुधार साबित होगा: पीड़ित पक्ष को दशकों तक ‘तारीख-पर-तारीख’ के मानसिक तनाव और अदालती खर्च से हमेशा के लिए राहत मिलेगी। तय समय में सजा मिलने से अपराधियों में कानून का डर बनेगा और गंभीर अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी। गरीब और आम वर्ग के लोगों का समय और पैसा बचेगा, जिससे न्याय प्रणाली पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा। असल सवाल: क्या यह केवल घोषणा है या ठोस जमीनी प्लान? कागजों और भाषणों में यह योजना जितनी असरदार लगती है, जमीनी हकीकत उतनी ही चुनौतीपूर्ण है। वर्तमान में देश की अदालतों में करोड़ों केस लंबित हैं। ऐसे में कुछ बुनियादी सवाल खड़े होते हैं: 1. जांच और फॉरेंसिक क्षमता: क्या पुलिस थानों और फॉरेंसिक लैब को इतने संसाधन मिलेंगे कि वे बिना किसी चूक के तय समय-सीमा में जांच और रिपोर्ट अदालत में सौंप सकें? 2. अदालतों का ढांचा: निचली अदालत से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक हर अपील को 3 साल के भीतर निपटाना बिना नए जजों की नियुक्ति और आधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के संभव नहीं दिखता। 3. लंबित मुकदमों का भार: पुराने लंबित मामलों के भारी बोझ के बीच नए मामलों को इतनी तेज रफ्तार देना न्यायिक प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी। सरकार यदि मजबूत बजट, पर्याप्त बुनियादी ढांचे और तकनीकी संसाधनों के साथ इस योजना को लागू करती है, तो यह जनता के हित में ऐतिहासिक कदम बनेगा। फिलहाल आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि यह मंच से किया गया केवल एक आकर्षक बयान बनकर रह जाएगा या वाकई लोगों को 3 साल में न्याय मिलना शुरू होगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on Threads (Opens in new window) Threads Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Post navigation BHEL दशहरा मैदान में ‘भारतीय न्याय संहिता’ प्रदर्शनी शुरू, गृह मंत्री अमित शाह और सीएम मोहन यादव ने किया अवलोकन भोपाल में सातवें ट्रैवल मार्ट का आगाज़, सीएम डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों से की सीधी बात