तिराना:

दक्षिण-पूर्वी यूरोपीय देश अल्बानिया इन दिनों तीव्र राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है। राजधानी तिराना में मौजूदा प्रशासन के खिलाफ चल रहा नागरिक विरोध हिंसक रूप अख्तियार कर चुका है। आंदोलनकारियों ने देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) परिसर में आगजनी की, जिससे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।

सरकारी प्रतिष्ठानों पर लगातार हमले

न्यायालय परिसर के अलावा प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय की इमारत में तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं, विधायी संसद भवन की सुरक्षा दीवारों और पुलिस चौकियों की ओर भी ज्वलनशील पदार्थ फेंके गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने रासायनिक गैस और पानी की बौछारों का प्रयोग किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में भारी टकराव देखा गया। इस संघर्ष में सैकड़ों नागरिक और सुरक्षाकर्मी घायल बताए जा रहे हैं।

आक्रोश की मुख्य वजहें

यह अशांति रातों-रात पैदा नहीं हुई, बल्कि इसकी जड़ें लंबे समय से सुलग रही समस्याओं में हैं:

 शिक्षा संकट और फीस वृद्धि: उच्च शिक्षण संस्थानों में अत्यधिक फीस और शैक्षणिक संसाधनों की कमी के खिलाफ युवाओं में गहरा असंतोष था।

 बेरोजगारी और पलायन: युवाओं के लिए अवसरों का अभाव और बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन ने असंतोष को और बढ़ाया।

 भ्रष्टाचार के आरोप: सरकार पर नीतिगत स्तर पर अनियमितताओं और आर्थिक कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

प्रशासनिक गतिरोध बरकरार

आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक शीर्ष स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन नहीं होता और समस्याओं के ठोस समाधान नहीं निकलते, विरोध थमेगा नहीं। वहीं, प्रशासन ने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रुख अपनाया है।

राजधानी में स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति व संवाद की अपील की जा रही है।

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