​शहडोल। मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम 2010 के अंतर्गत आमजन को तय समय-सीमा में सेवाएं उपलब्ध न कराना 8 अधिकारियों को भारी पड़ गया। कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने लापरवाही बरतने वाले इन पदाभिहित अधिकारियों पर अधिनियम की धारा 7(1)(क)(ख) के तहत एकमुश्त जुर्माना (अर्थदण्ड) लगाया है।

​कार्यालय कलेक्टर (लोक सेवा प्रबंधन), जिला शहडोल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 4 सितंबर से 9 सितंबर 2026 के बीच समय-सीमा पार कर चुके लंबित मामलों की समीक्षा की गई थी। जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने बिना किसी ठोस कारण के तय समय में आवेदनों का निपटारा नहीं किया। इसके बाद द्वितीय अपीलीय अधिकारी के अधिकारों का उपयोग करते हुए यह कार्रवाई की गई।

​इन अधिकारियों पर लगा जुर्माना:

  • ​नरेश सोनी (नायब तहसीलदार, वृत्त पपौंध, तहसील ब्यौहारी): 1,000 रुपये
  • ​एस.के. निगम (निरीक्षक, नाप-तौल विभाग, जिला शहडोल): 1,000 रुपये
  • ​रामकिशोर पद्माकर (नायब तहसीलदार, वृत्त बिजुरी, तहसील जैतपुर): 500 रुपये
  • ​श्याम करण पाव (सचिव, ग्राम पंचायत बरगवां, जनपद बुढार): 500 रुपये
  • ​जवाहरलाल पटेल (सचिव, ग्राम पंचायत ढोढा, जनपद जयसिंहनगर): 500 रुपये
  • ​ब्रजेन्द्र जैसवाल (सचिव, ग्राम पंचायत धनौरा, जनपद बुढार): 500 रुपये
  • ​दिलकरण पाव (सचिव, ग्राम पंचायत महुआटोला, जनपद जयसिंहनगर): 500 रुपये
  • ​चन्द्रशेखर तिवारी (सचिव, ग्राम पंचायत कुम्हेडिन, जनपद बुढार): 500 रुपये

​इन जरूरी सेवाओं से जुड़े थे मामले

लंबित मामलों में राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6-4) के तहत आपदा पीड़ितों को आर्थिक सहायता, अविवादित नामांतरण, जन्म और मृत्यु का अप्राप्यता प्रमाण पत्र तथा पेट्रोल-डीजल डिस्पेंसर पंप के पुनः सत्यापन जैसी महत्वपूर्ण नागरिक सेवाएं शामिल थीं।

​कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जुर्माने की राशि तय शासकीय मद में जमा कराएं और चालान की प्रति 3 कार्य दिवसों के भीतर लोक सेवा प्रबंधन कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करें।

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