भोपाल/ मध्यप्रदेश:

मध्य प्रदेश की राजनीति में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने राज्य की चुनाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से भोपाल की नरेला विधानसभा सीट को लेकर चौंकाने वाले दावे किए गए हैं, जहां एक ही छोटे से मकान में 100 से अधिक वोटर दर्ज पाए गए हैं।

नरेला विधानसभा: एक घर और 100 से ज्यादा वोटर

इस पूरे विवाद का केंद्र भोपाल की नरेला विधानसभा सीट है। कांग्रेस का आरोप है कि यहां की वोटर लिस्ट में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

• हैरान करने वाला आंकड़ा: शिकायत के अनुसार, नरेला के एक ही पते (Address) पर 100 से लेकर 117 तक मतदाताओं (Voters) के नाम दर्ज हैं।

• फर्जी पहचान पत्र: यह भी दावा किया गया है कि एक ही व्यक्ति की फोटो का इस्तेमाल करके अलग-अलग नामों से कई वोटर आईडी कार्ड बनाए गए हैं।

• कांग्रेस का कहना है कि किसी भी सामान्य घर में 100 लोगों का एक साथ रहना संभव नहीं है, जो साफ तौर पर फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।

27 सीटों पर खास नजर और 16 लाख नए वोटर

कांग्रेस ने चुनाव आयोग (Election Commission) को जो सबूत सौंपे हैं, उनमें केवल नरेला ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं:

• संदिग्ध 27 सीटें: कांग्रेस ने राज्य की उन 27 विधानसभा सीटों की लिस्ट सौंपी है, जहां 2023 के चुनावों में हार-जीत का अंतर बेहद कम (2000 से भी कम वोट) था। कांग्रेस का आरोप है कि इन्हीं सीटों पर सबसे ज्यादा फर्जी वोटर जोड़े गए हैं।

• अचानक बढ़े वोटर: पार्टी का दावा है कि 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, केवल 2 महीने के छोटे से समय में राज्य की वोटर लिस्ट में 16 लाख नए नाम जोड़ दिए गए। कांग्रेस के मुताबिक, इतनी जल्दी इतने बड़े स्तर पर नाम जुड़ना बिना किसी बड़ी साजिश के संभव नहीं है।

निर्वाचन आयोग में कांग्रेस की शिकायत

कांग्रेस के बड़े नेताओं (जिसमें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य शामिल हैं) ने दिल्ली और भोपाल में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने आयोग के सामने निम्नलिखित बातें रखीं:

1. लिस्ट फ्रीज की जाए: मौजूदा वोटर लिस्ट पर रोक लगाई जाए ताकि उसमें और कोई फर्जी नाम न जुड़ सके।

2. फिजिकल वेरिफिकेशन: जिन पतों पर 10 से ज्यादा वोटर दर्ज हैं, वहां चुनाव आयोग की टीम खुद जाकर जांच (Physical Verification) करे।

3. पारदर्शिता: चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों को बुलाकर उनके सामने वोटर लिस्ट का पूरा डेटा रखे और उन्हें विश्वास में ले।

4. कड़ी कार्रवाई: जिन अधिकारियों (बीएलओ या अन्य) की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा हुआ है, उन पर सख्त एक्शन लिया जाए।

आगे क्या होगा?

इस गंभीर शिकायत के बाद अब पूरी जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग पर आ गई है। चुनाव आयोग आमतौर पर ऐसी शिकायतों के बाद अपने जिला स्तर के अधिकारियों (कलेक्टर और चुनाव अधिकारियों) से रिपोर्ट मांगता है। यदि जांच में एक ही पते पर वास्तव में 100 फर्जी वोटर मिलते हैं, तो उन नामों को लिस्ट से हटा दिया जाएगा और संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

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