मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन (प्लेन क्रैश, 28 जनवरी 2026) के बाद अब एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जिस दिन अजित पवार का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, ठीक उसी तारीख को उनके मंत्रालयों में बैकडेट में जाकर धड़ाधड़ फाइलें पास की गईं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 जनवरी को जब पूरा राज्य शोक में डूबा था और सरकारी मशीनरी हादसे की जानकारी जुटाने में व्यस्त थी, तब मंत्रालय के कुछ विभागों में संदिग्ध रूप से काम चल रहा था। आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि उस एक ही दिन में अल्पसंख्यक विभाग और शिक्षा विभाग से जुड़ी करीब 75 अहम फाइलों को मंजूरी (Clearance) दी गई।

विपक्ष का हमला और जांच की मांग:

विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) के नेताओं ने इसे “शर्मनाक और संदिग्ध” करार दिया है। उनका सवाल है:

1. जब मंत्री (अजित पवार) उपलब्ध नहीं थे या हादसे का शिकार हो चुके थे, तो फाइलों पर हस्ताक्षर किसने किए?

2. क्या यह डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग था?

3. इतनी जल्दबाजी में कौन से फंड रिलीज किए गए?

एनसीपी (शरद पवार गुट) ने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक बड़ा भ्रष्टाचार हो सकता है जिसे “शोक की आड़ में” अंजाम दिया गया।

28 जनवरी 2026 को नासिक के पास हुआ था विमान हादसा।

एक ही दिन में 75 फाइलों के पास होने पर उठे सवाल।

सरकारी अधिकारियों ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी है।

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