अगर आप भी आने वाले दिनों में फ्लाइट से सफर करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। केंद्र सरकार ने डोमेस्टिक फ्लाइट्स (घरेलू उड़ानों) के किराये पर लगी रोक यानी ‘प्राइस कैप’ को 23 मार्च 2026 से हटाने का बड़ा फैसला लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि एयरलाइंस अब बाजार की डिमांड के हिसाब से अपनी टिकटों की कीमत खुद तय कर सकेंगी।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अब विमान कंपनियां यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूलेंगी?

आपको याद होगा कि दिसंबर 2025 में इंडिगो (IndiGo) की कई उड़ानें अचानक कैंसिल हो गई थीं। इस अफरा-तफरी के बीच एयरलाइंस ने टिकट के दाम आसमान पर पहुंचा दिए थे। यात्रियों को इस लूट से बचाने के लिए सरकार ने तुरंत एक्शन लिया और किराये की एक लिमिट तय कर दी थी (जैसे 500 किलोमीटर तक की फ्लाइट के लिए ज्यादा से ज्यादा 7500 रुपये)। अब चूंकि फ्लाइट्स का शेड्यूल वापस पटरी पर आ गया है, इसलिए सरकार ने यह पाबंदी हटा ली है।

क्या एयरलाइंस को मिल गई मनमानी की छूट?

बिल्कुल नहीं! सरकार ने एयरलाइंस को अपना किराया तय करने की आज़ादी जरूर दी है, लेकिन उनके हाथों में पूरी तरह से लगाम भी रखी है।

सरकार की पैनी नजर: नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) और डीजीसीए (DGCA) रियल-टाइम में फ्लाइट की टिकटों पर कड़ी नजर रखेंगे।

सख्त चेतावनी: विमान कंपनियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि वे टिकट के दाम जायज रखें।

फिर लगेगा बैन: त्योहारों, छुट्टियों या किसी आपातकालीन स्थिति में अगर एयरलाइंस ने बेवजह किराया बढ़ाया, तो सरकार दोबारा सख्त कार्रवाई करते हुए पाबंदी लगा सकती है।

यात्रियों की जेब पर पड़ेगा दोहरा असर?

किराये की पाबंदी हटने के साथ ही यात्रियों पर एक और बोझ बढ़ रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में फ्यूल (ईंधन) के दाम बढ़ने के कारण कई बड़ी एयरलाइंस ने अपनी टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाना भी शुरू कर दिया है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में हवाई सफर थोड़ा महंगा जरूर साबित हो सकता है।

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