नई दिल्ली/बेंगलुरु: आज जब दुनिया भर में साइबर हमलों और डेटा चोरी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, तब भारत की एक उभरती हुई स्पेस-टेक कंपनी ‘प्रमात्रा स्पेस’ (Pramatra Space) दुनिया को सुरक्षा का एक नया ‘क्वांटम कवच’ दे रही है। इसके साथ ही, हाल ही में भारत और कनाडा के बीच हुई टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप ने भारतीय स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल मौकों के नए दरवाजे खोल दिए हैं। आइए जानते हैं इस पूरी खबर के मायने: प्रमात्रा स्पेस और उनकी CEO का विज़न बेंगलुरु स्थित ‘प्रमात्रा स्पेस’ की शुरुआत इसकी फाउंडर और CEO रिचा हुकुमचंद (Richa Hukumchand) ने की थी। उनकी कंपनी का लक्ष्य भविष्य की तकनीक का इस्तेमाल करके डेटा को ‘अनहैकेबल’ (जिसे कभी हैक न किया जा सके) बनाना है। • क्या है तकनीक: प्रमात्रा ‘क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन’ (QKD) नामक एडवांस तकनीक पर काम कर रही है। • कैसे करती है काम: इसके तहत सैटेलाइट्स के जरिए खास ‘क्वांटम एन्क्रिप्शन कीज़’ (पासवर्ड) अंतरिक्ष से सीधे धरती पर मौजूद कंपनियों के सर्वर तक सुरक्षित रूप से भेजी जाती हैं। 🇮🇳 भारत के लिए यह इनोवेशन इतना अहम क्यों है? प्रमात्रा स्पेस जैसी कंपनियों का यह इनोवेशन भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है: • राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security): भारत के रक्षा (Defence), बैंकिंग, और सरकारी डेटा को भविष्य के सुपर-फास्ट क्वांटम कंप्यूटर्स भी हैक नहीं कर पाएंगे। • ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा: डेटा सिक्योरिटी के लिए अब हमें विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। भारत खुद इस तकनीक को बनाकर दूसरे देशों को बेच सकता है (जैसे जापान की कंपनी के साथ प्रमात्रा ने डील की है)। • ग्लोबल स्पेस पावर: इसरो (ISRO) के बाद अब भारत के प्राइवेट स्टार्टअप्स भी यह साबित कर रहे हैं कि भारत स्पेस और डीप-टेक (Deep-tech) में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। 2 मार्च की भारत-कनाडा डील: देश और टेक स्टार्टअप्स को क्या फायदा? 2 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई पीएम मार्क कार्नी के बीच एनर्जी, टैलेंट और टेक्नोलॉजी को लेकर जो ऐतिहासिक साझेदारी हुई है, उसका भारत और प्रमात्रा जैसे स्टार्टअप्स को सीधा फायदा मिलेगा: • ग्लोबल फंडिंग और मार्केट एक्सेस: इस द्विपक्षीय समझौते से कनाडा के बड़े निवेशक (Investors) भारत के स्पेस-टेक और डीप-टेक स्टार्टअप्स में आसानी से पैसा लगा सकेंगे। प्रमात्रा जैसी कंपनियों को उत्तरी अमेरिका का एक बड़ा मार्केट मिल सकेगा। • टैलेंट और रिसर्च एक्सचेंज: इस डील से दोनों देशों के टॉप वैज्ञानिक और इंजीनियर एक-दूसरे के साथ मिलकर एडवांस टेक्नोलॉजी (AI, स्पेस, साइबर सिक्योरिटी) पर रिसर्च कर सकेंगे। • इकोसिस्टम को मजबूती: जब दो देश सरकार के स्तर पर टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देते हैं, तो स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन बनाना, पुर्जे इम्पोर्ट/एक्सपोर्ट करना और दुनिया भर में अपने सैटेलाइट ऑपरेशन्स फैलाना बहुत आसान हो जाता है। एक तरफ ‘प्रमात्रा स्पेस’ (Pramatra Space)भारत की तकनीकी ताकत का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही है, तो दूसरी तरफ भारत सरकार द्वारा कनाडा जैसे देशों के साथ की गई नीतियां इन स्टार्टअप्स को ‘लोकल से ग्लोबल’ बनने का मजबूत मंच दे रही हैं। CEO रिचा हुकुमचंद (Richa Hukumchand) का परिचय: रिचा भारत के प्रमुख रक्षा अनुसंधान संगठन DRDO (Defence Research and Development Organisation) में एक साइंटिस्ट रह चुकी हैं। एवं वह मध्य प्रदेश के रायसेन की निवासी हैं और इनके पिता डॉ गौरीशंकर शेजवार मध्य प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री हैं जिन्होंने प्रदेश की राजनीति में पार्टी को मज़बूत बनाने काफ़ी योगदान दिए हैं ! CEO रिचा हुकुमचंद (Richa Hukumchand) Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation संसद में होगा महासंग्राम: क्या 9 मार्च को ओम बिरला को छोड़नी होगी स्पीकर की कुर्सी? जानिए पूरा गणित