नई दिल्ली:

संसद में इन दिनों ‘डिप्टी स्पीकर’ के पद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबर्दस्त तकरार चल रही है। विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि सरकार ने परंपराओं को दरकिनार करते हुए अब तक यह पद खाली क्यों रखा है। इसी मुद्दे पर सदन में बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और उसे पुराना इतिहास याद दिलाया।

खबर की मुख्य बातें:

• विपक्ष की मांग: भारतीय संसदीय परंपरा के अनुसार, स्पीकर का पद सत्ताधारी दल के पास होता है, जबकि डिप्टी स्पीकर का पद आमतौर पर विपक्ष को दिया जाता है। विपक्ष इसी परंपरा का हवाला देकर सरकार पर सवाल उठा रहा है।

• अमित शाह का करारा जवाब: गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि आज जो लोग परंपराओं की दुहाई दे रहे हैं, उन्होंने खुद सत्ता में रहते हुए इसका पालन नहीं किया था।

• अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास: शाह ने सदन में याद दिलाया कि कांग्रेस के समय में भी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आए थे। उन्होंने 1954 और 1966 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी कांग्रेस ने डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को नहीं दिया था, बल्कि अपनी ही पार्टी के नेता को उस कुर्सी पर बैठाया था।

• ‘दो बार’ का जिक्र: अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इतिहास में जब 2 बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जैसी स्थिति बनी, तब भी डिप्टी स्पीकर कांग्रेस का ही था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हमने तो कम से कम यह पद खाली रखा है, आपने तो यह पद अपनी ही पार्टी को दे दिया था।”

सियासी मायने:

अमित शाह के इस बयान ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस को उसी के पुराने फैसलों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। सरकार का साफ संदेश है कि कांग्रेस को उन नियमों पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है, जिन्हें उसने खुद अपने शासनकाल में तोड़ा था। इस तीखी बहस ने संसद के अंदर और बाहर एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।

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