नई दिल्ली/मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में एक तरफ दुनिया शांति वार्ता की उम्मीद कर रही है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से शांति वार्ता शुरू करने की बातों के बीच, दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले और तेज कर दिए हैं। इस बीच यूक्रेन के एक बड़े कदम ने पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। यूक्रेन ने रूस के सबसे बड़े क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) ठिकानों पर सटीक ड्रोन हमले किए हैं, जिसका सीधा असर भारत और ग्लोबल मार्केट पर पड़ने की आशंका है। शांति की बात, पर युद्ध में तनाव चरम पर जब भी किसी युद्ध में शांति समझौते की बात शुरू होती है, तो दोनों देश बातचीत की मेज पर खुद को ज्यादा ताकतवर दिखाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि रूस और यूक्रेन दोनों ने अपने हमले तेज कर दिए हैं: • रूस ने पिछले कुछ दिनों में यूक्रेन पर लगभग 1,000 ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं। • जवाब में यूक्रेन ने भी रूस के अंदर घुसकर सीधे उनके आर्थिक ठिकानों यानी तेल के कुओं और बंदरगाहों (Ports) को निशाना बनाया है। रूसी क्रूड ऑयल सप्लाई ठप: दुनिया भर में मचा हड़कंप यूक्रेन की रणनीति रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने की है। इन हालिया ड्रोन हमलों से रूस के बाल्टिक सागर स्थित उस्त-लुगा (Ust-Luga) और प्रिमोर्स्क (Primorsk) जैसे बड़े ऑयल टर्मिनल पर काम पूरी तरह से रुक गया है। • रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों के कारण रूस की लगभग 40% तेल निर्यात क्षमता पर ब्रेक लग गया है। • हर दिन करीब 2 मिलियन (20 लाख) बैरल कच्चे तेल की सप्लाई रुक गई है। • समुद्र में कम से कम 50 बड़े ऑयल टैंकर तेल लोड होने के इंतजार में फंसे हुए हैं। क्या भारत में महंगाई की रफ्तार फिर बढ़ेगी? रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है। जब रूस से तेल की सप्लाई रुकती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से ऊपर जाते हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात (import) करता है, जिसमें रूस एक बड़ा सप्लायर है। ऐसे में आम आदमी के मन में सवाल उठना लाजमी है कि क्या देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा? • तुरंत कोई खतरा नहीं: राहत की बात यह है कि भारतीय रिफाइनरियों ने भविष्य के संकट को देखते हुए रूस से पहले ही लगभग 60 मिलियन बैरल कच्चे तेल की एडवांस बुकिंग कर ली थी। इसलिए, भारत में फिलहाल तेल की कमी नहीं होगी। • आगे क्या होगा: अगर यह सप्लाई लंबे समय तक ठप रहती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। तेल महंगा होने का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ता है, जिससे खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की हर चीज महंगी हो सकती है। यानी शांति वार्ता की उम्मीदों के बीच शुरू हुआ यह तेल युद्ध आने वाले दिनों में भारत सहित पूरी दुनिया की जेब पर भारी पड़ सकता है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading... Post navigation महायुद्ध का 25वां दिन: अमेरिका का शांति प्रस्ताव और इजरायल-ईरान के बीच भीषण हमले! अमेरिका को ईरान का ‘जैसे को तैसा’ जवाब: शांति वार्ता फेल, खाड़ी देशों में फिर शुरू हुए हमले, क्या दुनिया में मचेगी तबाही?