हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट (18 फरवरी 2026 को पेश) में सरकारी स्कूल के बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए एक बहुत ही शानदार योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) को और बेहतर बनाते हुए बच्चों को मुफ्त दूध देने का फैसला किया है।

योजना की मुख्य बातें

किसे मिलेगा फायदा:

सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से लेकर 8वीं तक के बच्चों को मुफ्त दूध दिया जाएगा। इससे प्रदेश के करीब 55 से 80 लाख बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा।

• कब से होगी शुरुआत:

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ किया है कि यह व्यवस्था प्रदेश भर में अगले शैक्षणिक सत्र (Next Academic Session) से लागू कर दी जाएगी।

बजट और खर्च:

इस स्कूल मिल्क स्कीम (जिसे ‘यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना’ से भी जोड़ा जा रहा है) के लिए सरकार ने पहले साल में लगभग ₹600 करोड़ का बजट आवंटित किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आने वाले 5 सालों में इस योजना पर कुल ₹6,600 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

खुला दूध नहीं, बल्कि ‘टेट्रा पैक’ (Tetra Pack) का इस्तेमाल

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्कूलों में बच्चों को बाल्टी या बड़े बर्तनों में खुला दूध नहीं बांटा जाएगा। सरकार इसके लिए टेट्रा पैक (Tetra Pack) का इस्तेमाल करेगी। इसके पीछे कई अहम कारण हैं:

• शुद्धता की गारंटी (Zero Adulteration): टेट्रा पैक होने से रास्ते में या स्कूल में दूध के अंदर पानी या कोई अन्य मिलावट करने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। बच्चों को 100% सुरक्षित और शुद्ध दूध मिलेगा।

• भंडारण में आसानी (Easy Storage): टेट्रा पैक का दूध सामान्य तापमान पर भी जल्दी खराब नहीं होता है। इसलिए बिना बड़े फ्रिज के भी इसे स्कूलों में सुरक्षित तरीके से रखा जा सकेगा।

• बर्तनों के झंझट से मुक्ति: बच्चों को दूध पीने के लिए घर से ग्लास लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, स्कूलों में बर्तन धोने और साफ-सफाई करने का काम भी नहीं बढ़ेगा। बच्चे स्ट्रॉ की मदद से सीधे पैकेट से दूध पी सकेंगे।

इस योजना के दोहरे फायदे (Double Impact)

यह सिर्फ बच्चों की सेहत का प्लान नहीं है, बल्कि इसके पीछे राज्य की अर्थव्यवस्था को सुधारने की भी बड़ी रणनीति है:

1. कुपोषण पर प्रहार (Health): बढ़ते बच्चों को दूध के जरिए जरूरी प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य विटामिन्स मिलेंगे। इससे प्रदेश में कुपोषण दर में कमी आएगी और बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होगा।

2. किसानों और डेयरी उद्योग को बूम (Economy): मध्य प्रदेश वर्तमान में देश के दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है, और सरकार का लक्ष्य इसे पहले नंबर पर लाना है। लाखों बच्चों को रोज़ाना दूध बांटने से राज्य के किसानों, पशुपालकों और दुग्ध संघों (जैसे- सांची) को एक बहुत बड़ा और स्थायी बाजार (Institutional Market) मिलेगा। इससे किसानों की आमदनी में सीधा इजाफा होगा।

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