मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में इन दिनों माहौल काफी गरम है। शिक्षक संघ और सरकार के बीच कई बड़ी मांगों को लेकर लगातार खींचतान चल रही है। अगर आप सोच रहे हैं कि आखिर स्कूलों में पढ़ाने वाले नियमित (Permanent) शिक्षक और MP TET पास कर चुके युवा सड़कों पर क्यों हैं, तो आइए इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।

शिक्षक संघ के आंदोलन के 4 सबसे बड़े कारण:

1. पहले दिन से मिले 100% वेतन

• अभी नियम यह है कि जब कोई युवा MP TET पास करके शिक्षक बनता है, तो उसे शुरुआती सालों में पूरा वेतन नहीं मिलता। पहले साल 70%, दूसरे साल 80% और तीसरे साल 90% वेतन दिया जाता है।

• शिक्षकों का सीधा सवाल है कि जब वे स्कूल में पहले दिन से 100% ड्यूटी कर रहे हैं, तो उनका वेतन क्यों काटा जा रहा है? उनकी मांग है कि जॉइनिंग के दिन से ही 100% वेतन दिया जाए।

2. सुरक्षित बुढ़ापे के लिए पुरानी पेंशन (OPS) की मांग

• साल 2005 के बाद सरकारी नौकरी में आए सभी शिक्षकों को नई पेंशन स्कीम (NPS) में रखा गया है।

• शिक्षकों का कहना है कि यह नई स्कीम शेयर बाजार पर टिकी है, जिसमें रिटायरमेंट के बाद बहुत कम पेंशन मिलती है। इसलिए पूरे प्रदेश के शिक्षक अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) वापस लागू करने की मांग पर अड़े हैं।

3. खाली पड़े पदों पर भर्ती (पद वृद्धि)

• प्रदेश में हजारों युवाओं ने कड़ी मेहनत करके MP TET (वर्ग 1, 2 और 3) की परीक्षा पास कर ली है, लेकिन वे अब भी बेरोजगार बैठे हैं।

• सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं। युवाओं की मांग है कि सरकार पदों की संख्या बढ़ाए (पद वृद्धि करे) और रुकी हुई भर्तियों को तुरंत चालू करके उन्हें जॉइनिंग दे।

4. 10-15 सालों से रुका हुआ प्रमोशन

• जो शिक्षक सरकारी स्कूलों में 10 या 15 साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वे आज भी उसी पद और उसी वेतनमान पर अटके हुए हैं।

• शिक्षा विभाग में प्रमोशन (पदोन्नति) की प्रक्रिया कई सालों से रुकी हुई है। शिक्षक संघ चाहता है कि इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए ताकि पुराने शिक्षकों को उनका हक मिल सके।

आखिरकार मामला कहां अटका है?

कुल मिलाकर, शिक्षक अपने हक, सम्मानजनक वेतन और सुरक्षित भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं। वहीं, सरकार के सामने इन सभी मांगों को एक साथ पूरा करने में सबसे बड़ी रुकावट भारी-भरकम सरकारी बजट की है। सरकार कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले खजाने पर पड़ने वाले बोझ का हिसाब लगा रही है।

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