असम में आज (9 अप्रैल 2026) लोकतंत्र का सबसे बड़ा दिन है। राज्य की सभी 126 विधानसभा सीटों पर जनता अपने अगले मुख्यमंत्री का चुनाव करने के लिए वोट डाल रही है। लेकिन इस ‘महा-वोटिंग’ से ठीक पहले असम की राजनीति में एक ऐसा मुद्दा गरमा गया है, जिसने बीजेपी और मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यह मुद्दा है— गोमांस (बीफ) का विवाद। चुनाव से ठीक पहले इस विवाद ने ऐसा रूप ले लिया है कि अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है: क्या यह एक बयान हेमंत बिस्वा सरमा की कुर्सी छीन सकता है? कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद? इस पूरे बवाल की शुरुआत गुवाहाटी सेंट्रल सीट से हुई। यहाँ असम जातीय परिषद (AJP) की एक युवा उम्मीदवार हैं- कुंकी चौधरी। चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और फोटो वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि कुंकी चौधरी की मां सुजाता गुरुंग ने बीफ खाया है। इस पर मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने बहुत कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि चुनाव के बाद वह कुंकी चौधरी की मां को जेल भेजेंगे। उन्होंने इसे ‘सनातन विरोधी’ कदम बताया, क्योंकि असम के सख्त कानून के मुताबिक होटलों या सार्वजनिक जगहों पर बीफ खाना और परोसना अपराध है। सीएम का यू-टर्न: “घर में खाओ, हम नहीं रोक रहे” जब यह मामला बहुत ज्यादा बढ़ गया और चुनाव एकदम सिर पर आ गए, तो सीएम सरमा को अपनी सफाई देनी पड़ी। इसी सफाई ने विवाद को और बड़ा कर दिया। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “असम में एक बड़ा मुस्लिम समुदाय गोमांस खाता है। हम उन्हें रोक नहीं रहे हैं। बस इसे पब्लिक प्लेस या मंदिरों के 5 किलोमीटर के दायरे में मत खाइए। इसे अपने घर के अंदर खाइए।” विपक्ष ने तुरंत लपक लिया मुद्दा जैसे ही मुख्यमंत्री का यह ‘घर में खाओ’ वाला बयान आया, आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस ने बीजेपी को चारों तरफ से घेर लिया। विपक्ष का कहना है कि उत्तर भारत में बीजेपी बीफ के नाम पर बहुत सख्त राजनीति करती है, लेकिन वोट के लिए असम में उनके ही मुख्यमंत्री घर में बीफ खाने की छूट दे रहे हैं। विपक्ष ने इसे बीजेपी का ‘दोहरा चरित्र’ बताकर सोशल मीडिया पर कैंपेन चला दिया है। क्या चली जाएगी हेमंत बिस्वा की कुर्सी? (चुनावी गणित) आज जब जनता ईवीएम (EVM) का बटन दबा रही है, तो इस बयान का दो तरफा नुकसान हेमंत बिस्वा को हो सकता है: • मुस्लिम वोटर की नाराजगी: जेल भेजने की धमकियों और बीफ पर बार-बार आ रहे बयानों से मुस्लिम और अल्पसंख्यक वोटर पूरी तरह से कांग्रेस और AJP गठबंधन के पक्ष में एकजुट हो सकता है। • हिंदू वोटर में कन्फ्यूजन: सीएम सरमा की पूरी कोशिश थी कि चुनाव हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर लड़ा जाए। लेकिन ‘घर में बीफ खाने’ की छूट वाले बयान से उनका अपना कट्टर हिंदू वोटर भी कन्फ्यूज हो सकता है कि आखिर सरकार का असली स्टैंड क्या है। नतीजों पर टिकी निगाहें चुनाव में एक गलत बयान पूरा खेल पलट सकता है। हेमंत बिस्वा सरमा ने विपक्ष पर हमला तो किया, लेकिन विपक्ष के पलटवार ने उन्हें बैकफुट पर ला दिया। आज शाम तक असम की जनता अपना फैसला ईवीएम में लॉक कर देगी। अब यह बीफ विवाद बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित होता है या हेमंत बिस्वा की कुर्सी ले डूबता है, इसका सही जवाब 4 मई को चुनाव के नतीजों वाले दिन ही मिलेगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading...