वॉशिंगटन । अमेरिका:

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा महायुद्ध अब केवल दो देशों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा आर्थिक संकट बनता जा रहा है। युद्ध के कारण शेयर बाजार लगातार गिर रहे हैं, कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।

ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर अमेरिका अपने अरबों डॉलर इस युद्ध में क्यों फूंक रहा है? अमेरिका क्यों पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को इतने बड़े जोखिम में डाल रहा है?

आइए इसके 5 सबसे बड़े कारणों को आसान भाषा में समझते हैं:

1. दुनिया का ‘बॉस’ बने रहने की जिद

अमेरिका दुनिया की इकलौती महाशक्ति (Superpower) बने रहना चाहता है। अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता, तो मिडिल ईस्ट में अमेरिका का दबदबा और डर हमेशा के लिए खत्म हो जाता। अमेरिका दुनिया पर अपना यह कंट्रोल और रुतबा बचाने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है।

2. चीन और रूस को कड़ा संदेश

पिछले कुछ समय में दुनिया में रूस, चीन और ईरान का एक बहुत मजबूत गुट बन गया था। ईरान लगातार रूस को हथियार भी दे रहा था। अमेरिका ईरान को तबाह करके सीधे तौर पर चीन और रूस को यह संदेश देना चाहता है कि अगर किसी ने अमेरिका की ताकत को चुनौती दी, तो उसका अंजाम ईरान जैसा ही होगा।

3. हथियार बनाने वाली कंपनियों का भारी मुनाफा

युद्ध से दुनिया की अर्थव्यवस्था को भले ही नुकसान हो, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा हथियार बनाने वाली बड़ी कंपनियों को होता है। इनमें से ज्यादातर कंपनियां अमेरिका की ही हैं। जब भी कोई बड़ा युद्ध होता है, तो इन अमेरिकी कंपनियों के हथियारों की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। यानी युद्ध का यह अरबों डॉलर का खर्च घूम-फिरकर वापस अमेरिका के ही बड़े उद्योगपतियों की जेब में जा रहा है।

4. इजरायल की सुरक्षा सर्वोपरि

इजरायल अमेरिका का सबसे करीबी दोस्त है। अमेरिकी राजनीति और वहां की सरकार में इजरायल के समर्थकों का बहुत बड़ा प्रभाव है। ईरान लगातार इजरायल को खत्म करने की धमकियां दे रहा था और वहां हमले भी कर रहा था। इजरायल को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका दुनिया की परवाह किए बिना किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है।

5. दुनिया के तेल व्यापार पर कंट्रोल

भले ही आज दुनिया में महंगाई बढ़े, लेकिन अमेरिका चाहता है कि दुनिया के तेल व्यापार की चाबी हमेशा उसके ही हाथ में रहे। अगर ईरान ताकतवर हो जाता, तो वह दुनिया भर में जाने वाले तेल के मुख्य समुद्री रास्ते (Strait of Hormuz) पर अपना कब्ज़ा जमा सकता था। अमेरिका यह पावर कभी भी ईरान के हाथ में नहीं जाने दे सकता था।

कुल मिलाकर अमेरिका के लिए यह सिर्फ एक युद्ध नहीं है, बल्कि दुनिया पर अपनी बादशाहत और अपना पावर कायम रखने का सबसे बड़ा दांव है। इस दांव को जीतने के लिए वह अपनी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को दांव पर लगाने से पीछे नहीं हट रहा है।

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